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क्या सचमुच यूपी में हुई चीनी वायरस HMPV की एंट्री? लखनऊ के CMO ने दिया जवाब

HMPV Patient in Lucknow: क्या चाइनीज वायरस HMPV की सचमुच उत्तर प्रदेश में एंट्री हो चुकी है? ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि राजधानी में इस वायरस के लक्षण वाले मरीज सामने आए हैं। जिसके बाद सीएमओ ने बताया है कि लखनऊ में एचएमपीवी के मरीज की खबर महज अफवाह है।

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HMPV पर यूपी से आया बड़ा अपडेट।

Uttar Pradesh: यूपी की राजधानी लखनऊ में एचएमपीवी का मरीज सामने आने की खबर को मुख्य चिकित्सा अधिकारी एनबी सिंह ने अफवाह करार दिया। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने गुरुवार को सीएमओ एनबी सिंह से बात करते हुए कहा कि लखनऊ में अब तक इस वायरस के कोई भी मामले सामने नहीं आए हैं।

लखनऊ में अब तक एक भी एचएमपीवी का केस नहीं आया

मुख्य चिकित्सा अधिकारी एनबी सिंह ने लोगों से संयम रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी तक हमारे पास लखनऊ में एक भी केस एचएमपीवी का नहीं आया है। यदि भविष्य में इस तरह के मामले सामने आते हैं, तो हम जल्द ही संज्ञान लेकर मीडिया के माध्यम से जनता को सूचित करेंगे।

हालांकि बृहस्पतिवार की रात में कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये बताया गया कि चाइनीज वायरस HMPV (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) का मामला लखनऊ से सामने आ सकता है। क्योंकि एचएमपीवी संक्रमण के संदेह में एक महिला को बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सीएमओ ने कहा कि सर्दियों के मौसम में सामान्य रूप से सांस और हृदय संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है, जो कि एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कोई आशंका की बात नहीं है। यह वायरस सामान्य हो सकता है और इसे लेकर अभी तक किसी प्रकार की कंफर्मेशन नहीं आई है। इसलिए, जनता को इस प्रकार की भ्रामक खबरों से परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम पूरी तरह से स्थिति पर निगरानी रख रहे हैं और समय-समय पर सही जानकारी देंगे।

लोगों से की अपील, भ्रामक जानकारी से घबराएं नहीं

उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी भी समय एचएमपीवी वायरस के मरीज लखनऊ में पाए जाते हैं, तो स्वास्थ्य विभाग तुरंत कदम उठाएगा और लोगों को उचित दिशा-निर्देश देगा। उन्होंने पुनः लोगों से अपील की कि वह किसी भी भ्रामक जानकारी से घबराएं नहीं और सभी अफवाहों पर विश्वास न करें।

बता दें कि एचएमपीवी के कहर को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने कमर कस ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने देश में श्वसन संबंधी बीमारियों की वर्तमान स्थिति और उनके प्रबंधन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की समीक्षा की। स्वास्थ्य सचिव की ओर से राज्यों को आईएलआई (इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण) और एसएआरआई (गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण) की निगरानी को और मजबूत करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, राज्यों से यह भी कहा गया कि वह निवारक उपायों के बारे में जनता में जागरूकता बढ़ाएं, ताकि ऐसे मामलों का समय पर पता लगाया जा सके।

बता दें कि चीन से शुरू हुआ एचएमपीवी अब भारत तक पहुंच चुका है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु में इस वायरस से जुड़े मामले की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, महाराष्ट्र सरकार ने इस संबंध में एडवाइजरी भी जारी कर दी है। केंद्र सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को पहले ही कह दिया कि हमें समय-समय पर इस संबंध में अपडेट देते रहना चाहिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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