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नए संसद के उद्घाटन से पहले पुलिस को मिला बड़ा इनपुट, 15 अगस्त- 26 जनवरी जैसी होगी सुरक्षा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 27, 2023, 05:48 PM IST

New Parliament: नई संसद के उद्घाटन समारोह के लिए 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसी सुरक्षा लगाई गई है। सीसीटीवी से पूरे संसद भवन की निगरानी की जा रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, संसद भवन की सुरक्षा में 24 घंटे सुरक्षा तैनात रहेगी।

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एडवांस टेक्नोलॉजी से होगी नई संसद की सुरक्षा

New Parliament: देश की नई संसद का कल यानी 28 मई को उद्घाटन होना है। इसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संसद भवन में हवन-पूजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले पुलिस को बड़ा इनपुट मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को पता चला है कि संसद भवन के उद्घाटन से पहले नई संसद की दीवारों पर एंटी सरकार या एंटी पीएम स्लोगन लिखे जा सकते हैं। इस इनपुट के बाद नए संसद भवन की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, नए संसद भवन की सुरक्षा में भवन के आसपास दिल्ली पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। करीब 70 जवानों को इसकी सुरक्षा में लगाया गया है और खुद एसीपी रैंक के अधिकारी इसकी पूरी मॉनीटिरिंग कर रहे हैं।

चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के बंदोबस्त

नई संसद के उद्घाटन समारोह के लिए 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसी सुरक्षा लगाई गई है। सीसीटीवी से पूरे संसद भवन की निगरानी की जा रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, संसद भवन की सुरक्षा में 24 घंटे सुरक्षा तैनात रहेगी। इसके अलावा संसद की सुरक्षा में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जो पुराने संसद भवन में नहीं था।

कई लेयर में होगी संसद भवन की सुरक्षा

नए संसद भवन की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सुरक्षा के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तो किया ही जा रहा है। इसके साथ ही यहां आधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। संसद भवन की सुरक्षा कई लेयर में की जाएगी। इसमें थर्मल इमेजिंग सिस्टम लगाया गया है, इससे किसी भी तरह की घुसपैठ की जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा संसद भवन की निगरानी के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम से लैस एडवांस सीसीटीवी लगाए गए हैं। संसद भवन की सुरक्षा इस तरह से की गई है कि अगर किसी भी प्रकार का हमला होता है, तो उसे तुरंत नाकाम किया जा सके और किसी सांसद या कर्मचारी को नुकसान भी न पहुंचे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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