Kailash Mansarovar Indian Pilgrims Rescued: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच से सकुशल बाहर निकाले गए 21 भारतीय श्रद्धालुओं का समूह शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गया। यह सभी श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए थे, तभी रसुवा के पास भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ की तबाही में फंस गए। नई दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुद इन नागरिकों से मुलाकात कर उनके अनुभव जाने और उनके सुरक्षित लौटने पर राहत जताई।
आपदा के बीच से जिंदा लौटकर आए आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम निवासी एक श्रद्धालु ने उस भयानक मंजर को याद करते हुए बताया, "वहां हालात बेहद गंभीर हैं। बाढ़ का उफनता पानी मेरे ठिकाने से महज 100 मीटर की दूरी पर बह रहा था। ऐसा लग रहा था कि सब कुछ बह जाएगा, लेकिन भगवान की कृपा से मेरी जान बच गई।" पीड़ित ने बताया कि संकट के समय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्री नारा लोकेश और स्थानीय विधायक ने उनसे फोन पर बात कर लगातार उनका ढांढस बंधाया।
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315 से ज्यादा भारतीयों की तलाश जारी -विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि नेपाली सेना ने बेहद कठिन परिस्थितियों में इन श्रद्धालुओं को रेस्क्यू कर काठमांडू पहुंचाया, जिसके बाद भारतीय दूतावास ने इन्हें सुरक्षित दिल्ली लाने का प्रबंध किया। विदेश मंत्री ने कहा कि अब तक लगभग 85 भारतीयों को अलग-अलग इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन करीब 315 से अधिक ऐसे भारतीय नागरिक हैं जिनसे संपर्क साधा जाना अभी बाकी है।
इस तबाही में अब तक 538 से अधिक शव बरामद
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस तबाही में अब तक 538 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं और 977 लोग अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि चीन की सीमा की तरफ फंसे करीब 400 भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके परिवारों से बात करा दी गई है।
नेपाल सरकार की मदद के लिए भारत ने राहत सामग्री की तीसरी बड़ी खेप भी रवाना कर दी है। इन विमानों के जरिए टेंट, कंबल, दवाएं, पानी साफ करने की गोलियां, जनरेटर और खाने-पीने का सामान भेजा जा रहा है। भारत सरकार का कहना है कि जब तक हर एक भारतीय नागरिक को सुरक्षित खोज नहीं लिया जाता, यह बचाव अभियान जारी रहेगा।
