KPSC Recruitment Irregularities: केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने केपीएससी की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के इस्तीफे की शुक्रवार को मांग की। कुमारस्वामी ने चयन प्रक्रिया को लेकर शिकायतों और जारी जांच के बावजूद उम्मीदवारों की नियुक्ति करने संबंधी सरकार के फैसले पर सवाल उठाया।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे
कुमारस्वामी ने विशेष रूप से ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के लिए कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के माध्यम से भर्ती किए गए 24 सहायक कार्यकारी अभियंताओं की नियुक्ति पर सवाल उठाया। भारी उद्योग और इस्पात मंत्री ने आरोप लगाया कि अंतिम चयन सूची जारी होने से पहले ओएमआर शीट में हेरफेर और सीसीटीवी फुटेज गायब होने की शिकायतें सामने आई थीं।
कुमारस्वामी ने प्रियांक पर साधा निशाना
कुमारस्वामी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ''यदि आपको अपने पद और अपने शब्दों की जरा भी परवाह है, तो आपको तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। यदि आप पारदर्शी प्रशासन का उदाहरण पेश करना चाहते हैं, तो ऐसा करके दिखाइए।'' वह प्रियांक खरगे का जिक्र कर रहे थे, जो परीक्षा और चयन प्रक्रिया के दौरान सिद्दारमैया सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री थे।
CCTV फुटेज की जांच के आदेश
कुमारस्वामी ने कहा कि सितंबर 2023 में केपीएससी को सौंपी गई एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अस्थायी चयन सूची में शामिल कई अभ्यर्थियों ने पिछली परीक्षाओं में बहुत कम अंक हासिल किए थे, लेकिन दो जुलाई, 2023 को आयोजित एईई परीक्षा में ओएमआर शीट के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी। शिकायत में परीक्षा केंद्रों की ओएमआर शीट और सीसीटीवी फुटेज का सत्यापन करने की मांग की गई थी।
उन्होंने कहा कि केपीएससी ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के सत्यापन का आदेश दिया। बाद में आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय उप-समिति का गठन किया गया। कुमारस्वामी के अनुसार, समिति ने अभ्यर्थियों के आवेदन, प्रवेश पत्र और चेहरे की पहचान से संबंधित डेटा की जांच की, लेकिन पाया कि कुछ अभ्यर्थियों से संबंधित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति को जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
कुमारस्वामी ने कहा कि इसके बावजूद, जब जांच अभी हो रही है, तब 31 जनवरी, 2024 को अंतिम चयन सूची प्रकाशित कर दी गई। उन्होंने पूछा, '' केपीएससी सचिव ने बार-बार आयोग के अधिकारों की अनदेखी की और अपनी मनमर्जी की सूची सरकार को भेज दी। आपने उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की है? जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपने क्या कार्रवाई की है?'' उन्होंने कहा कि इसके बाद केपीएससी ने चयन सूची को आगे भेजे जाने के तरीके पर आपत्ति जताई और मुख्य सचिव से उस पर कार्रवाई न करने को कहा।
आयोग की उप-समिति ने बाद में 24 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट और कार्बन प्रतियों की जांच की और निर्णय लिया कि इन दस्तावेजों की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए।
कुमारस्वामी ने कहा कि इसके बाद ओएमआर शीट और उपलब्ध प्रतियों को अपराध जांच विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा गया, जहां उत्तर पुस्तिकाओं पर किए गए निशानों की जांच की गई। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि चयन प्रक्रिया में लगे आरोपों और जारी जांच के बावजूद सरकार ने नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे क्यों बढ़ाई।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय में कार्यवाही का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अदालत ने संकेत दिया था कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने परीक्षा और चयन प्रक्रिया के दौरान विभाग के प्रभारी मंत्री के रूप में प्रियांक खरगे की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ''जब ये कथित अनियमितताएं हुईं, तब आप पंचायत राज मंत्री थे। इसके बावजूद नियुक्तियां की गईं और अब ये लोग वेतन भी ले रहे हैं। आपने उन्हें नियुक्त करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की? क्या आपने इन सभी मामलों की जांच नहीं की?''
कुमारस्वामी ने सरकार के पारदर्शिता के दावों और भ्रष्टाचार के आरोपों से निपटने संबंधी उसके तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ''मुख्यमंत्री (डीके शिवकुमार) का कहना है कि अब इस राज्य में भ्रष्टाचार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का कोई सवाल ही नहीं है।'' कुमारस्वामी ने सवाल किया कि भर्ती से जुड़े आरोपों के सामने आने के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की है।
