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'दुख की बात है कि अधिकारियों ने सबक नहीं सीखा', NEET पेपर लीक मामले पर SC की सख्त टिप्पणी, याचिकाकर्ता की क्या है मांग?

NEET-UG 2026 Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने एनटीए को भंग करने और निष्पक्ष सीबीआई जांच तक की मांग की है। याचिकाओं में एनटीए को भंग करने और मामले की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की गई है।

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सुप्रीम कोर्ट में नीट पेपर लीक मामले पर सुनवाई हुई। AI IMAGE

सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी पेपर लीक (NEET-UG 2026 Paper Leak) और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका की कॉपी सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने एनटीए को भंग करने और निष्पक्ष सीबीआई जांच तक की मांग की है।

कोर्ट ने पेपर लीक विवाद के मद्देनजर शुरू किए गए सुधारों के कार्यान्वयन पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि यह दुख की बात है कि अदालत द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों और निर्देशों के बावजूद अधिकारियों ने सबक नहीं सीखा है।

मामले की सुनवाई दौरान कोर्ट ने एनटीए (National Testing Agency) को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन को आदेशों के अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन फेडरेशन ( FAIMA ) ने NEET पेपर लीक के आरोपों के बाद 2026 की मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद NEET-UG परीक्षा प्रणाली में कई सुधारों की मांग करते हुए 13 मई को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिकाओं में मांग की गई है कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा न्यायिक निगरानी में कराई जाए।

'हाई-पावर्ड कमेटी का हो गठन'

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि पुनर्परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक “हाई-पावर्ड कमेटी” गठित की जाए, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें। याचिका में यह भी मांग की गई है कि इस कमेटी में एक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक को शामिल किया जाए।

याचिका में कहा गया है कि जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था “NEIC” औपचारिक रूप से अस्तित्व में नहीं आ जाती, तब तक NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा इसी न्यायिक समिति की निगरानी में कराई जाए। इसके अलावा याचिकाओं में NEET-UG 2026 के सेंटर-वाइज रिजल्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है, ताकि किसी भी संदिग्ध पैटर्न, असामान्य परिणाम या संभावित गड़बड़ी की पारदर्शी तरीके से जांच की जा सके।

क्या है पेपर लीक मामला?

यह मामला देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई एक बहुत बड़ी धोखाधड़ी और धांधली से जुड़ा है, जिसके चलते नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मई 2026 में हुई इस परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इस साल 3 मई को करीब 23 लाख छात्रों ने यह परीक्षा दी थी, लेकिन तुरंत बाद राजस्थान और महाराष्ट्र से पेपर लीक के पुख्ता इनपुट सामने आए, जहां आरोपियों ने लीक हुए पेपर को "गेस पेपर" के नाम से पीडीएफ बनाकर बेचा था, जिसके 120 से ज्यादा सवाल असली पेपर से हूबहू मैच कर रहे थे।

सीबीआई (CBI) की जांच में खुलासा हुआ कि यह पेपर किसी प्रिंटिंग प्रेस से नहीं, बल्कि NTA के अंदरूनी एक्सपर्ट पैनल में शामिल पुणे और लातूर के शिक्षकों (जैसे मनीषा हवलदार और मनीषा मांढरे) की मिलीभगत से लीक हुआ था, जिन्होंने प्रति छात्र 5 से 50 लाख रुपये में इसके सौदे किए थे। इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने 12 मई को परीक्षा निरस्त कर दी और अब 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा (Re-NEET) कराने का फैसला लिया गया है, जबकि सीबीआई अब तक लातूर के कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमार author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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