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कितना बदला राज्यसभा का गणित? आंकड़ों से समझिए संसद के उच्च सदन में कौन-कितना मजबूत हुआ

NDA in Rajya Sabha: राज्यसभा में सत्तारूढ़ गठबंधान एनडीए ने एक बार फिर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। छह नामांकित सदस्यों के साथ राजग के पास मामूली बहुमत हो गई है। इससे कई विधेयकों को पारित कराने में मदद मिल सकती है। आपको राज्यसभा का गणित समझना चाहिए।

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राज्यसभा में किस पार्टी के कितने सांसद?

Parliament News: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास छह नामांकित सदस्यों के समर्थन के साथ राज्यसभा में मामूली बहुमत है, जिससे पार्टी को वक्फ (संशोधन) विधेयक जैसे प्रमुख विधेयकों को पारित कराने में मदद मिल सकती है। अब संसद के उच्च सदन से एनडीए को कम चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में आपको राज्यसभा का सारा नंबर गेम समझना चाहिए।

बहुमत के आंकड़े से कितना आगे है NDA?

हाल में संपन्न राज्यसभा उपचुनाव के बाद संसद के ऊपरी सदन में सदस्यों की संख्या 234 हो गई है, जिसमें भाजपा के पास अपने 96 सदस्य हैं। राजग के सदस्यों की संख्या 113 है। आम तौर पर सरकार के पक्ष में वोट डालने वाले छह नामांकित सदस्यों के साथ राजग का संख्या बल बढ़कर 119 हो जाता है, जो बहुमत के मौजूदा आंकड़े 117 से दो अधिक है।

विपक्षी दलों के पास कितने राज्यसभा सांसद?

ऊपरी सदन में कांग्रेस के 27 सदस्य, जबकि उसके सहयोगी दलों के 58 सदस्य हैं, जिससे राज्यसभा में विपक्षी गठबंधन के कुल सदस्यों की संख्या 85 है। राज्यसभा में सदस्यों की बड़ी संख्या वाली अन्य पार्टियों में वाईएसआर कांग्रेस के पास नौ और बीजू जनता दल (बीजद) के पास सात सदस्य हैं। अन्नाद्रमुक के पास चार सदस्य, तीन निर्दलीय और अन्य सांसद उन छोटे दलों के हैं, जो कांग्रेस या भाजपा किसी के भी गठबंधन में शामिल नहीं हैं।

किस राज्य से कितनी सीटें अभी खाली हैं?

ऊपरी सदन में जम्मू-कश्मीर की चार सीट रिक्त हैं, क्योंकि केंद्र-शासित प्रदेश को अभी तक अपनी पहली विधानसभा नहीं मिली है। सदन में कुल 11 सीट रिक्त हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर की चार, आंध्र प्रदेश की चार, चार नामांकित सदस्य और ओडिशा की एक सीट शामिल है। वाईएसआर कांग्रेस के दो सदस्यों और बीजद के एक सदस्य ने हाल में राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। बीजद सदस्य सुजीत कुमार इस्तीफा देने के बाद भाजपा में शामिल हो गए, जिसके इस सीट पर उपचुनाव जीतने की संभावना है। वाईएसआर कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले दो सदस्यों-एम वेंकटरमण राव और बी मस्तान राव के आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) में शामिल होने की संभावना है, जो भाजपा की सहयोगी दल है।

राज्यसभा में भाजपा के सहयोगियों में जनता दल-यूनाइटेड (जदयू), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), जनता दल-सेक्यूलर (जद-एस), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), शिवसेना, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), नेशनल पीपुल्स पार्टी, पीएमके, तमिल मनीला कांग्रेस और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) शामिल हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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