अडानी और ईवीएम मुद्दे पर कांग्रेस को एनसीपी झटका दे चुकी है। इन दोनों ही मुद्दे पर शरद पवार और उनके भतीज अजीत पवार कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टी की लाइन से अलग राय रख चुके हैं। जिसके बाद विपक्षी एकता पर सवाल उठने लगा था। अब लगता है कि इसका डैमेज कंट्रोल शुरू हो गया है। क्योंकि गुरुवार को एनसीपी के मुखिया शरद पवार न केवल मल्लिकाजुर्न खड़गे से मिले बल्कि उन्होंने राहुल गांधी से भी मुलाकात की।
क्या बोले राहुल गांधी
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने गुरुवार को नई दिल्ली में खड़गे के आवास पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की। बैठक के बाद, राहुल गांधी ने कहा कि वे सभी "विपक्षी एकता" के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने बैठक के बाद कहा- "विपक्ष को एकजुट करने की एक प्रक्रिया शुरू हो गई है। हम सभी विपक्षी एकता के लिए काम करने के लिए साथ हैं।"
क्या बोले कांग्रेस अध्यक्ष
कांग्रेस प्रमुख खड़गे ने संवाददाताओं से कहा-"देश और लोकतंत्र को बचाने और संविधान को सुरक्षित रखने के लिए, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए, युवाओं के रोजगार के लिए और महंगाईऔर स्वायत्त निकायों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों के लिए, हम एक के रूप में लड़ने के लिए तैयार हैं। हम एक-एक करके सभी से बात करेंगे। पवार साहब भी यही कहते हैं। हम सभी खुश हैं कि शरद पवार सीधे मुंबई से यहां आए और हमारे साथ चर्चा की। विपक्षी एकता के लिए मैंने और राहुल गांधी ने नीतीश जी और तेजस्वी जी के साथ बैठक की।"
क्या बोले शरद पवार
मुलाकात के बाद शरद पवार ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा- "अन्य महत्वपूर्ण विपक्षी दलों के साथ बातचीत की जाएगी, चाहे वह ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल या अन्य हों, ताकि उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश की जा सके।"
विपक्षी एकता की मुहीम
इस बार विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश खुद कांग्रेस कर रही है। जिसका नेतृत्व राहुल गांधी और खड़गे कर रहे हैं। इससे पहले यह कोशिश क्षेत्रीय पार्टियां करती रही थीं, लेकिन राहुल गांधी को सजा और सदस्यता रद्द होने के बाद, साथ ही शरद पवार के अडाणी मुद्दे पर कांग्रेस से अलग राय रखने के बाद कांग्रेस खुद से विपक्ष को एक करने में जुट गई है। इससे पहले राहुल गांधी ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी।
