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नवीन पटनायक को प्यार से 'पप्पू' कहते थे उनके दोस्त, CM रहते हुए बनाया ये अनोखा रिकॉर्ड

  • Agency by: Agency
  • Updated Jul 23, 2023, 10:40 AM IST

Odisha CM Record: ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भारत में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु को पीछे छोड़ दिया है। नवीन का परिवार और उनके बचपन के दोस्त उन्हें प्यार से 'पप्पू' कहते थे। आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।

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भारत में दूसरे सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले नेता।

Naveen Patnaik News: बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक रविवार को अनोखा रिकॉर्ड बनाते हुए भारत में दूसरे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहते हुए 23 साल और 139 दिन पूरा कर लिया। पटनायक ने रविवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ दिया। ज्योति बसु ने 21 जून 1977 से 5 नवंबर 2000 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया, जो 23 वर्ष, 138 दिन है।

लिस्ट में टॉप पर हैं पवन चामलिंग

सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग आजादी के बाद सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति हैं। चामलिंग 12 दिसंबर 1994 से 27 मई 2019 तक सिक्किम के सीएम रहे। पवन चामलिंग इस पद पर 24 साल और 166 दिनों तक रहे। ज्योति बसु, जो 2018 में चामलिंग के आगे निकलने तक भारत में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री थे, अब लिस्ट में तीसरे पायदान पर आ गए हैं। पवन चामलिंग और ज्योति बसु के बाद नवीन पटनायक लगातार पांच बार सीएम बनने वाले तीसरे मुख्यमंत्री हैं।

नवीन पटनायक को दोस्त पुकारते थे 'पप्पू'

नवीन पटनायक का जन्म 16 अक्टूबर 1946 को ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक और उनकी पत्नी ज्ञान पटनायक के घर हुआ था। नवीन का परिवार और उनके बचपन के दोस्त उन्हें प्यार से 'पप्पू' कहते थे। पटनायक ने अपने पिता और स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक के निधन के बाद राजनीति में एंट्री की। शुरुआती जीवन के वो राजनीति से दूर रहे, लेकिन अपने पिता के निधन के बाद 1997 में वह राजनीति में आए और ओडिशा के अस्का संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव में 11वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने गए। नवीन पटनायक ने तबसे कभी चुनावी हार का स्वाद नहीं चखा।

कैसे हुई बीजू जनता दल की स्थापना?

नवीन के सियासत में आने के करीब एक साल बाद ही जनता दल विभाजित हो गया और उन्होंने अपने पिता के नाम पर बीजू जनता दल (बीजेडी) की स्थापना की। बीजद ने बाद में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ गठबंधन कर चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया। 1998 और 1999 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद, पटनायक दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की कैबिनेट में केंद्रीय इस्पात और खान मंत्री बने। बाद में, वह 2000 में भाजपा के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए राज्य लौट आए।

5 मार्च 2000 को ओडिशा के मुख्यमंत्री बने

बहुमत के साथ विधानसभा चुनाव जीतने के बाद, नवीन ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और सर्वसम्मति से गठबंधन के नेता के रूप में चुने गए और 5 मार्च 2000 को ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए 2004 में लोकसभा चुनाव हार गया, लेकिन नवीन पटनायक के नेतृत्व वाला गठबंधन राज्य विधान सभा चुनाव में विजयी हुआ और वह मुख्यमंत्री बने रहे। हालांकि, 2009 में नवीन पटनायक की बीजेडी ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया। 2007 के दौरान कंधमाल दंगों के लिए आलोचना होने के बाद पटनायक ने खुद को एनडीए से अलग कर लिया।

बढ़ता रहा नवीन पटनायक का सियासी दबदबा

2009 में बीजद ने राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से 14 और 147 विधानसभा सीटों में से 103 सीटें जीतीं। पटनायक ने लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2009 के बाद से बीजद ने अकेले ही राज्य में तीनों विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की। बीजद ने 2014 और 2019 में विधानसभा चुनाव जीता और पटनायक अब तक ओडिशा में अपराजेय बने हुए हैं।

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