Chemist Strike in India: ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में देशभर में केमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठनों द्वारा की गई हड़ताल का असर आम लोगों पर साफ दिखाई देने लगा है। इस हड़ताल के चलते दिल्ली समेत कई राज्यों में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दवाइयों के लिए काफी परेशान होना पड़ा। दिल्ली के आरएमएल, सफदरजंग और एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं आसानी से नहीं मिल सकीं। कई लोग दवाइयों की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए।
नकली और गलत दवाओं के इस्तेमाल का खतरा बढ़ा
अधिकतर मेडिकल दुकानों पर ताले लगे थे और बाहर हड़ताल से जुड़ा नोटिस चिपका हुआ था। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों (Nationwide Bandh Chemists) का कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि बिना उचित जांच के दवाइयों की बिक्री हो रही है, जिससे नकली और गलत दवाओं के इस्तेमाल का खतरा बढ़ गया है। साथ ही फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवाएं खरीदने के मामले भी सामने आ रहे हैं।
हड़ताल में कई राज्यों के मेडिकल स्टोर शामिल
यह हड़ताल अखिल भारतीय केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट संगठन (AIOCD) के आह्वान पर की गई थी, जिसमें कई राज्यों के मेडिकल स्टोर शामिल हुए। हालांकि कुछ राज्यों में प्रशासन की ओर से मेडिकल सेवाएं चालू रखने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कई जगह असर देखने को मिला। लखनऊ, मुंबई, बेंगलुरु, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे शहरों में भी हड़ताल का प्रभाव दिखाई दिया। कहीं मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद रहीं तो कहीं केवल आपातकालीन दवाओं की सीमित बिक्री जारी रही।
मरीजों का कहना है कि अचानक हुई इस हड़ताल से उन्हें काफी दिक्कत हुई है। खासकर गंभीर बीमारियों के मरीजों को जरूरी दवाएं समय पर नहीं मिल पाईं। वहीं, दवा विक्रेता संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल सरकार और संगठनों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है।
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