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'लाखों का जुर्माना, कई महीने की जेल', राष्ट्रीय प्रतीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार कर सकती है बड़े बदलाव

National Symbols of India: देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के दुरुपयोग के लिए सरकार कड़े दंड पर विचार कर रही है। सूत्रों ने अनुसार, प्रस्तावित बदलावों में जुर्माने में वृद्धि और कारावास की सजा शामिल है।

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राष्ट्रीय प्रतीकों का दुरुपयोग करने पर होगी जेल, केन्द्र सरकार कड़े कानून लाने पर कर रही विचार

Photo : iStock

National Symbols of India: राष्ट्रीय प्रतीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार कड़े दंड पर विचार कर रही है। इसके लिए केंद्र सरकार नाम और प्रतीक (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950 में महत्वपूर्ण संशोधनों पर विचार कर रही है, ताकि कानून को मजबूत बनाया जा सके। सूत्रों ने अनुसार, प्रस्तावित बदलावों में जुर्माने में वृद्धि और कारावास की सजा शामिल है। वर्तमान कानून के तहत, उल्लंघनकर्ताओं को प्रतीकों और नामों के अनुचित उपयोग के लिए मात्र 500 रुपये का जुर्माना देना पड़ता है।

यह अधिनियम केंद्र सरकार की अनुमति के बिना व्यापार, व्यवसाय या पेशे के लिए या किसी पेटेंट के शीर्षक, ट्रेडमार्क, डिजाइन में राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है। उपभोक्ता मामले का मंत्रालय संशोधन प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने पहली बार अपराध करने वालों के लिए जुर्माना बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्द करेगा निर्णय

वहीं बार-बार उल्लंघन करने वालों को पांच लाख रुपये तक का जुर्माना और छह महीने की जेल की सजा हो सकती है। कुछ मंत्रालयों ने कम दंड और जेल की सजा को खत्म करने की वकालत की है। इस बारे में अंतिम निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल को करना है। जानकारी के अनुसार, अगर इस बदलाव को मंजूरी मिल जाती है, तो यह 74 साल पहले अधिनियमित होने के बाद से अधिनियम में पहला संशोधन होगा, जो राष्ट्रीय प्रतीकों के दुरुपयोग को रोकने के केन्द्र सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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