National Panchayati Raj Day: भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए हाल ही में पहली बार जारी किए गए पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) में गुजरात ने ग्रामीण शासन और सतत विकास के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सशक्त गांव, समृद्ध राष्ट्र’ के विजन और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के परिणामोन्मुखी नेतृत्व के तहत गुजरात ने ग्रामीण विकास में यह विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है।
गुजरात की 346 पंचायतों को मिली अग्रणी
हर वर्ष 24 अप्रैल को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 1992 के 73वें संविधान संशोधन की याद दिलाता है, जिसने भारत में पंचायती राज प्रणाली को संस्थागत रूप दिया। इसी अवसर पर पंचायत उन्नति सूचकांक में गुजरात की हालिया उपलब्धि उसकी मजबूत शासन व्यवस्था और सतत ग्रामीण विकास में अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। भारत सरकार के पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) में 2,55,699 ग्राम पंचायतों में से 2,16,285 ने मान्य डेटा प्रस्तुत किया। इनमें से 699 पंचायतें अग्रणी, 77,298 बेहतर प्रदर्शन और 1,32,392 आकांक्षी श्रेणी में रहीं। इसमें से गुजरात की 346 पंचायतों को अग्रणी और 13,781 को बेहतर प्रदर्शन की श्रेणी में स्थान मिला, जो दोनों ही श्रेणियों में देश में सर्वाधिक है।
PAI के लिए स्टेट नोडल ऑफिसर और गुजरात के पंचायत विभाग के एडिशनल डेवलपमेन्ट कमिश्नर डॉ गौरव दहिया (IAS) ने इस उपलब्धि के पीछे की राज्य सरकार की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुजरात की यह उपलब्धि जमीनी विकास और सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के प्रति राज्य की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस सफलता के पीछे कई समीक्षा बैठकों, विभिन्न क्षमतावर्धन सत्रों और सभी स्तरों पर समन्वित प्रयासों की अहम भूमिका रही है। गुजरात की पंचायतों ने डेटा-आधारित योजना और विभागीय समन्वय का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया है। राज्य सरकार, विकसित पंचायत के विजन को आधार बनाकर, साक्ष्य-आधारित सुशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
पंचायत उन्नति सूचकांक: क्या है? और यह क्यों है अहम?
पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के सतत विकास लक्ष्यों (LSDGs) के अनुरूप प्रगति को मापने वाला एक समग्र मूल्यांकन उपकरण है। यह सूचकांक गांवों के जमीनी विकास को आंकने और पंचायतों की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसमें गरीबी मुक्त और बेहतर आजीविका, स्वस्थ पंचायत, बाल-अनुकूल पंचायत, जल-पर्याप्त पंचायत, स्वच्छ और हरित पंचायत, आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचे वाली पंचायत, सामाजिक रूप से न्यायसंगत और सुरक्षित पंचायत, सुशासन युक्त पंचायत और महिला-अनुकूल पंचायत, जैसे 9 विषय शामिल हैं। इन विषयों का मूल्यांकन 435 स्थानीय संकेतकों और 566 डेटा बिंदुओं के माध्यम से किया गया है।
