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मणिपुर हिंसा मामले में गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन, तीन मामलों की जांच NIA को सौंपी

Manipur violence: एनआईए उन मामलों की जांच करेगी, जिसके कारण मणिपुर में लोगों की जान गई और सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हुआ। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी आदेश के बाद एजेंसी ने मणिपुर पुलिस से ये मामले अपने हाथ में ले लिए हैं।

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मणिपुर हिंसा मामले की NIA करेंगी जांच।

Manipur violence: मणिपुर हिंसा मामले में गृह मंत्रालय ने बड़ा एक्शन लिया है। मंत्रालय ने मणिपुर हिंसा से जुड़े तीन मामलों की जांच राष्ट्रयी जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। एनआईए उन मामलों की जांच करेगी, जिसके कारण लोगों की जान गई और सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हुआ। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी आदेश के बाद एजेंसी ने मणिपुर पुलिस से ये मामले अपने हाथ में ले लिए हैं।

यह खबर तब सामने आई है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को महाराष्ट्र चुनाव में अपनी सभी रैलियां रद्द कर दी थीं और दिल्ली लौट गए थे। उन्होंने मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों को राज्य में शांति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने का निर्देश दिया। शाह ने महाराष्ट्र में अपनी चुनावी रैलियां रद्द करके लौटने के तुरंत बाद यह बैठक की। सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और उन्हें शांति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने का निर्देश दिया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मणिपुर में महिलाओं और बच्चों के शव बरामद होने के बाद विरोध प्रदर्शन और हिंसा के कारण स्थिति अस्थिर बनी हुई है। मणिपुर पिछले साल मई से ही जातीय संघर्ष से जूझ रहा है।

इन तीन मामलों की जांच करेगी NIA

1. पहला मामला 8 नवंबर, 2024 को जिरीबाम पुलिस स्टेशन में पूरी तरह से सशस्त्र उग्रवादियों द्वारा जिरीबाम क्षेत्र में एक महिला की हत्या के संबंध में दर्ज किया गया था।

2. दूसरा मामला 11 नवंबर, 2024 को बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जो सशस्त्र उग्रवादियों द्वारा जिरीबाम के जकुराधोर करोंग और बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की चौकी (ए-कंपनी, 20वीं बटालियन) पर हमले से जुड़ा था।

3. तीसरा मामला 11 नवंबर, 2024 को बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन में बोरोबेकरा क्षेत्र में घरों को जलाने और नागरिक की हत्या के संबंध में दर्ज किया गया था।

राजनीतिक दलों के कार्यालयों में लगाई गई आग

हिंसा प्रभावित मणिपुर के जिरीबाम जिले में रविवार रात कई राजनीतिक दलों के कार्यालयों में आगजनी की घटनाएं हुई हैं। इस बीच बच्चों सहित छह शवों की बरामदगी के बाद जिरीबाम में शनिवार से व्यापक विरोध-प्रदर्शन के बाद सेना सहित संयुक्त सुरक्षा बलों ने रविवार रात इंफाल में फ्लैग मार्च किया। कुकी-जो जनजाति के एक प्रमुख संगठन, स्वदेशी जनजातीय नेताओं के मंच (आईटीएलएफ) ने रविवार रात कहा कि जिरीबाम में शनिवार रात कम से कम पांच चर्च, एक स्कूल, एक पेट्रोल पंप और आदिवासियों के 14 घरों को प्रतिद्वंद्वी समुदाय के हमलावरों ने जला दिया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शीर्ष अधिकारियों के नेतृत्व में सेना, असम राइफल्स, बीएसएफ, सीआरपीएफ, मणिपुर पुलिस समेत राज्य कमांडो ने रविवार रात राजधानी इंफाल और उसके बाहरी इलाकों में फ्लैग मार्च किया। पुलिस ने बताया कि रविवार को बराक नदी में तैरती हुई एक महिला का शव बरामद किया गया। शव को असम पुलिस ने कछार जिले में बराक नदी से बरामद किया, जो जिरीबाम की सीमा पर है। शव की तस्वीर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद रविवार को जिरीबाम में फिर से तनाव भड़क गया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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