नागपुर के काटोल तहसील के राऊलगांव स्थित SBL Energy Limited की डेटोनेटर पैकिंग यूनिट में रविवार को हुए भीषण विस्फोट में 18 लोगों की मौत और 24 लोग घायल हो गए। जिसके बाद सियासी हलकों में इस हादसे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। अब महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी(SP) नेता अनिल देशमुख ने फडणवीस सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मैंने छह महीने पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्र सरकार के मंत्रियों और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव ऑर्गनॉइजेशन (PESO) को पत्र लिखकर नागपुर में विस्फोटक बनाने वाली फैक्ट्रियों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया।
'समय पर ऑडिट होता तो टल सकती थी त्रासदी'
देशमुख ने कहा कि बाजरगांव क्षेत्र में पहले भी विस्फोट हो चुके हैं,जिसके बाद उन्होंने सुरक्षा मानकों की समीक्षा की मांग की थी। अगर समय पर सुरक्षा ऑडिट किया गया होता तो आज की यह बड़ी घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने इसे सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन का नतीजा बताया।
गौरतलब है कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव ऑर्गनॉइजेशन ,जो पेट्रोलियम और विस्फोटक पदार्थों का राष्ट्रीय तकनीकी नियामक है, उसका मुख्यालय भी नागपुर में ही स्थित है। ऐसे में लगातार हो रहे हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुआवजे पर अलग-अलग ऐलान
महाराष्ट्र सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने घोषणा की कि विस्फोटक फैक्ट्री में जान गंवाने वालों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही संबंधित कंपनी भी मृतकों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। वहीं, पीएम मोदी ने भी मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।
अनिल देशमुख ने मांग की कि राज्य सरकार 25 लाख रुपये और संबंधित कंपनी 50 लाख रुपये प्रति मृतक के परिजन को दे। देशमुख ने बाजरगांव क्षेत्र की सभी विस्फोटक फैक्ट्रियों में तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की भी मांग की और अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताई एक-एक बात
समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मैं जितने लोगों को निकाल सकता था, निकालने की कोशिश की... हमने प्राइवेट गाड़ियां बुलाईं, कंपनी की महज एक ही एंबुलेंस थी... आग नहीं, मेन पॉवर पर ब्लास्ट हुआ... मैंने 10, जबकि मेरे दोस्त ने 4 शव निकाले... यह एक सेल प्लांट था... जहां पर महिलाएं काम करती थीं। इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
