नागालैंड (Nagaland) में KYC के दौरान एक शख्स के साथ कुछ ऐसा हुआ कि अब वो चर्चा का गंभीर विषय बना हुआ है। दरअसल जब शख्स के KYC लिए आंख को स्कैन करने की कोशिश की जा रही थी, तब शख्स की आंखों की बनावट के कारण वो स्कैन नहीं हो पा रही थी। जिसके लिए उसकी पलकें तक खींचनी पड़ रही थी। अब इसी का वीडियो सामने आया है, जिसके बाद से इसे लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
टेमजेन इम्ना अलांग ने शेयर किया वीडियो
नागालैंड के उच्च शिक्षा और जनजातीय मामलों के मंत्री टेमजेन इम्ना अलांग (Temjen Imna Along) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस घटना का वीडियो शेयर किया है। वीडियो देखने में भले ही मजाकिया जैसा लगे, लेकिन इसने फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सीमाओं को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि अगर किसी व्यक्ति की प्राकृतिक शारीरिक बनावट को तकनीक पहचान नहीं पा रही है, तो समस्या व्यक्ति में है या उस तकनीक के डिजाइन में?
KYC के दौरान चेहरे की पहचान नहीं कर पाया सिस्टम
वायरल वीडियो में पूर्वोत्तर भारत का एक व्यक्ति बैंक या वित्तीय सेवा से जुड़ी KYC प्रक्रिया पूरी करता दिखाई देता है। इस दौरान चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक बार-बार उसके चेहरे को स्कैन करने की कोशिश करती है, लेकिन सिस्टम उसे सही तरीके से पहचान नहीं पाता। वीडियो में कुछ स्थानीय लोग उसकी मदद करते नजर आते हैं। कैमरे के सामने चेहरे को सही तरीके से दिखाने के लिए वे उसकी पलकों को खींचने की कोशिश करते हैं, ताकि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम तस्वीर को स्वीकार कर सके।
नागालैंड के मंत्री टेमजेन इम्ना अलांग ने इस वीडियो को 'Struggle is real' कैप्शन के साथ शेयर किया है। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
मजाकिया वीडियो से शुरू हुई गंभीर बहस
वीडियो को भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में शेयर किया गया हो, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे तकनीक की बड़ी खामी से जोड़कर देखा। लोगों का सवाल है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में डिजिटल पहचान से जुड़ी तकनीक बनाते समय अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों की शारीरिक विविधता को कितना ध्यान में रखा जाता है?
