अल-फलाह यूनिवर्सिटी को एनएएसी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। तस्वीर-ANI
Al-Falah University : मान्यता होने के झूठे दावे पर एनएएसी ने दिल्ली विस्फोट मामले की जांच के घेरे में आए अल फलाह विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एनएएसी ने कहा है कि यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर उससे मान्यता मिलने की बात कही है जो कि झूठी है। NAAC ने यूनिवर्सिटी के इस दावे को 'गुमराह' करने वाला और अपने नियमों के खिलाफ बताया है।
अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के स्टाफ सदस्य उमर उन नबी, मुजम्मिल शकील और शाहीन सईद दिल्ली में सोमवार शाम हुए कार ब्लास्ट से जुड़े पाए गए हैं। इस विस्फोट में 12 लोगों की मौत हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर यह दावा किया गया है कि इसकी दो शाखाएं अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग NAAC से मान्यता प्राप्त हैं।
हालांकि परिषद के अधिकारियों ने कहा कि यह मान्यता अब वैध नहीं है, क्योंकि यह केवल पांच वर्षों के लिए ही मान्य रहती है। स्वयं विश्वविद्यालय को कभी भी मान्यता प्राप्त नहीं हुई थी। बता दें कि NAAC शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता का अपने मानकों पर मूल्यांकन करता है।
अल फलाह विश्वविद्यालय की शुरुआत 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी और एमबीबीएस की कक्षाएं 2019 में शुरू हुईं। इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 76 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2014 में हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2006 के तहत की गई थी। पढ़े-लिखे लोगों के ‘पाकिस्तान समर्थित सरपरस्तों के इशारे पर काम करते’ हुए पाए जाने के बाद जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि यह विश्वविद्यालय ऐसे व्यक्तियों के लिए आश्रय स्थल कैसे बन गया।
सोमवार शाम दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास विस्फोटकों से लदी एक कार में हुए उच्च-तीव्रता वाले विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे। पुलवामा का डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी अल-फलाह विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर था।
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