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'मेरी जिंदगी कुछ ज्यादा ही मुश्किल हो गई है...'मछुआरों से मुलाकात के बाद ऐसा क्यों बोले राहुल गांधी

Rahul Gandhi: राहुल गांधी ने संसद परिसद में आज मछुआरों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। कांग्रेस का तर्क है कि मछुआरों को राहुल गांधी के कक्ष तक जाने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद राहुल गांधी को रिसेप्शन में आकर उनसे मुलाकात करनी पड़ी।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी।

Photo : Twitter

Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को संसद परिसर में मछुआरों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात के लिए राहुल गांधी को संसद की रिसेप्शन पर आना पड़ा। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि हमारा हक बनता है कि हम किसी से भी मिल सकें, लेकिन सरकार ऐसा करने नहीं दे रही।

कांग्रेस पार्टी का कहना था कि मछुआरों के प्रतिनिधियों को राहुल गांधी के कक्ष तक जाने की अनुमति नहीं दी गई, इसलिए राहुल गांधी ने उनसे रिसेप्शन पर ही मुलाकात की। इस पर राहुल गांधी ने कहा, मेरी जिंदगी कुछ ज्यादा मुश्किल हो गई है (माई लाइफ बिकम बिट मोर डिफिकल्ट), पहले उधर ही मिल लेता था, अब यहां आना पड़ता है।

विपक्ष में है, इसलिए यह सबकुछ चलता रहता है

इस मुलाकात को लेकर राहुल गांधी ने यह भी कहा कि हम लोग विपक्ष में हैं और यह सब कुछ चलता रहता है। जब किसानों का प्रतिनिधिमंडल आया था तब स्पीकर ने सदन को कहा कि उन्हें रोका नहीं जा रहा है, लेकिन अब फिर से रोक दिया गया है। उनका कहना था कि मछुआरों के इन प्रतिनिधियों को उनके कक्ष तक आने के लिए पास जारी नहीं किए गए। इससे पहले राहुल गांधी किसानों के प्रतिनिधिमंडल, सफाई कर्मचारियों व अन्य लोगों से संसद भवन स्थित अपने कक्ष में मुलाकात कर चुके हैं। दो दिन पहले मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी।

किसान संगठन से मिले थे राहुल गांधी

किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ राहुल गांधी की यह मुलाकात संसद भवन स्थित उनके कार्यालय में हुई। प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त किसान मोर्चा के 11 सदस्य शामिल थे। इस दौरान राहुल गांधी ने किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्ज मुक्ति जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने इन मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव डालने की बात कही। 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने एमएसपी पर कानूनी आश्वासन की अपनी मांग दोहराई थी। इसके अलावा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने देश भर के किसानों द्वारा झेली जाने वाली समस्याओं को भी राहुल गांधी के समक्ष रखा था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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