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नप गए महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल? फिर से खुल गया बेनामी संपत्ति का मामला, विशेष अदालत का बड़ा फैसला

मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को 2021 के उस बेनामी संपत्ति मामले को दोबारा शुरू करने का आदेश दिया, जिसमें महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल भी आरोपी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुंबई उच्च न्यायालय ने पूर्व में यह कार्यवाही केवल "तकनीकी आधार" पर रद्द की थी, न कि "मामले के गुण-दोष" के आधार पर।

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महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल (फोटो-PTI)

महाराष्ट्र के वरिष्ठ मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता छगन भुजबल के खिलाफ 2021 में दर्ज बेनामी संपत्ति मामले में अब फिर से कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। मुंबई की एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने मंगलवार को यह मामला बहाल करने का आदेश दिया, यह कहते हुए कि उच्च न्यायालय द्वारा पहले इसे तकनीकी आधार पर रद्द किया गया था, न कि गुण-दोष के आधार पर।

मामला क्या है?

आयकर विभाग ने वर्ष 2021 में छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज भुजबल, रिश्तेदार समीर भुजबल, और उनसे जुड़ी तीन कंपनियों- आर्मस्ट्रांग इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, परवेश कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, देविशा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड- के खिलाफ बेनामी संपत्ति (Benami Property) रखने के आरोप में मामला दर्ज किया था। केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया था कि ये सभी पक्ष 2008-09 से 2010-11 के बीच बेनामी लेनदेन में संलिप्त थे और कथित तौर पर मुंबई और नासिक की गिरना शुगर मिल्स की संपत्तियों पर उनकी संदिग्ध पकड़ थी।

कानूनी कार्यवाही और उच्च न्यायालय का फैसला

विशेष अदालत ने नवंबर 2021 में आरोपियों को समन जारी किया था, लेकिन भुजबल परिवार ने इस कार्रवाई को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

दिसंबर 2023 में उच्च न्यायालय ने मामले को रद्द कर दिया था, यह कहते हुए कि कार्यवाही एक मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मिसाल के आधार पर वैध नहीं थी। हालांकि, अदालत ने उस समय यह स्पष्ट किया था कि यदि सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका स्वीकार करता है और पुरानी मिसाल को पलटता है, तो कार्यवाही दोबारा शुरू की जा सकती है।

विशेष अदालत का ताजा फैसला

अब, जब सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली है और पूर्व की मिसाल को अमान्य कर दिया है, विशेष अदालत ने फैसला सुनाया है कि अब कार्यवाही को फिर से बहाल किया जाए। विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने अपने आदेश में कहा, "उच्च न्यायालय ने मामला गुण-दोष के आधार पर खारिज नहीं किया था, बल्कि केवल तकनीकी आधार पर किया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मिसाल खारिज किए जाने के बाद, कार्यवाही को बहाल करना अनिवार्य हो गया है।"

आगे की सुनवाई

अब यह मामला अपने मूल चरण में लौट आया है, और अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2025 को मुंबई की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में होगी। छगन भुजबल, महाराष्ट्र सरकार में एक प्रभावशाली मंत्री और अनुभवी नेता माने जाते हैं। उन पर पहले भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। यह मामला उनके राजनीतिक करियर के लिए एक और बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। हालांकि, अभी आरोप तय नहीं हुए हैं और मुकदमा अपने प्रारंभिक चरण में है, ऐसे में आगामी सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि आरोप कितने ठोस हैं।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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