मुगल मूल रूप से मध्य एशिया के रहने वाले थे। मुगल मूल रूप से मध्य एशिया के रहने वाले थे और उनका संबंध तुर्क–मंगोल वंश से था। हालांकि फरगना घाटी में रहने के दौरान मुगल वंश का नामों निशान नहीं था। तब तक मुगलों के नाम से जाना जाने वाला बाबर का वंश, तुर्क–मंगोल वंश के तौर पर जाना जाता था। यहां मुगलों का इतिहास नहीं था, मुगलों का इतिहास भारत आने के बाद शुरू होता है।
मुगल वंश की स्थापना बाबर ने की थी। मुगल साम्राज्य की नींव रखने वाले जहीरुद्दीन बाबर का जन्म आज के उज़्बेकिस्तान के फरगाना घाटी (अंदिजान) में हुआ था। बाबर खुद को दो महान वंशों से जोड़ता था- तैमूर (पिता की ओर से – तैमूरी वंश), चंगेज खान (मां की ओर से – मंगोल वंश)। इसी वजह से उन्हें “मुगल” कहा गया, जो “मंगोल” का ही फारसी रूप है। बाबर ने पहले समरकंद पर राज करने की कोशिश की, लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने हिंदुस्तान की ओर रुख किया और 1526 में पानीपत की लड़ाई जीतकर मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
बाबर को फरग़ाना घाटी (उज़्बेकिस्तान) छोड़कर भागना पड़ा क्योंकि वहाँ उसकी सत्ता लगातार खतरे में पड़ती रही। उसके भागने के पीछे मुख्य कारण राजनीतिक अस्थिरता, विरोधी सरदारों की साजिशें और कमजोर सत्ता आधार थे। समरकंद जैसे समृद्ध शहर पर कब्ज़ा पाने के लिए कई तुर्क–मंगोल सरदार लड़ रहे थे। बाबर ने समरकंद पर कब्ज़ा करने की कोशिश की, कुछ समय के लिए जीता भी, लेकिन ज्यादा समय टिक नहीं पाया। इस बीच फरगना में भी बगावत हो गई। कमजोर आर्थिक स्थिति और लगातार हमलों के कारण बाबर के पास स्थिर शासन करने की ताकत नहीं बची। नतीजतन उसे फरगना घाटी छोड़नी पड़ी और वह भटकते-लड़ते काबुल पहुंचा।
समरकंद और फरगाना दोनों खोने के बाद बाबर ने काबुल पर कब्ज़ा किया (1504)। यहां उसने मजबूत शासन स्थापित किया और धीरे-धीरे अफगानिस्तान के बड़े हिस्सों पर अपना नियंत्रण जमा लिया। काबुल उसके लिए शक्ति का नया आधार बना, यहीं से आगे भारत पर नजर टिकाई गई।
भारत आने से पहले बाबर की सेना संख्या के लिहाज से बहुत बड़ी नहीं, लेकिन तकनीक, प्रशिक्षण और युद्धक रणनीति के कारण बेहद ताकतवर थी। इतिहासकारों के अनुसार, भारत पर चढ़ाई से पहले बाबर के पास लगभग 10,000 से 15,000 सैनिक थे। बाद में कुछ स्थानीय बल जुड़ने से यह संख्या करीब 12–15 हज़ार मानी जाती है।
भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना 1526 ईस्वी में हुई, जब मध्य एशिया के शासक ज़हीरुद्दीन बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर सत्ता अपने हाथ में ले ली। यह निर्णायक लड़ाई 21 अप्रैल 1526 को हरियाणा के पानीपत में हुई, जिसे इतिहास में पानीपत की पहली लड़ाई के नाम से जाना जाता है। इस विजय के बाद बाबर ने दिल्ली और आगरा पर कब्ज़ा किया और यहीं से मुगल साम्राज्य की नींव मजबूत होती गई।
फरगना घाटी (Fergana Valley) आज मध्य एशिया का एक बड़ा और संपन्न इलाका है, जो प्रमुख रूप से उज़्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिज़स्तान में फैला हुआ है। यह घाटी ऐतिहासिक रूप से कृषि, व्यापार और संस्कृति का केंद्र रही है, और आज भी इसकी पहचान वैसी ही है—हालांकि आधुनिक दुनिया के प्रभावों के साथ।