Ramji Lal Suman: हाथरस की सांसद-विधायक अदालत ने राणा सांगा पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन के खिलाफ दायर याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया। सांसद-विधायक अदालत के न्यायाधीश दीपक नाथ सरस्वती ने मतेंद्र सिंह गहलोत द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुनाया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सुमन ने राज्यसभा में महाराणा सांगा पर विवादित बयान देकर क्षत्रिय समाज का अपमान किया है।
संसद में की थी टिप्पणी, याचिका खारिज
याची गहलोत ने याचिका में कहा था कि वह महाराणा सांगा के वंशज हैं और पूरा क्षत्रिय समाज उनके शौर्य को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देखता है। इससे पहले, उन्होंने रामजीलाल सुमन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की भी कोशिश की थी। अदालत ने कहा, संसद के सदस्य ने अगर कोई बयान संसद में दिया है तो उनके खिलाफ किसी भी अदालत में कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। लिहाजा यह याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है। इसे नामंजूर किया जाता है।
राणा सांगा यानी संग्राम सिंह प्रथम 1508 से 1528 तक मेवाड़ के शासक थे। सांसद सुमन ने कहा था कि मैं इस जन्म में माफी नहीं मांगूंगा, मुझे अगले जन्म का पता नहीं है। सुमन ने यह टिप्पणी उनके आगरा स्थित घर पर करणी सेना के सदस्यों द्वारा किए गए हमले के एक दिन बाद की थी। सुमन ने कहा थी कि उन्हें सच स्वीकार करना सीखना होगा। बाबर को राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए आमंत्रित किया था। उन्हें यह गलतफहमी थी कि बाबर एक लुटेरा है और वह वापस चला जाएगा और हम शासन करेंगे।
कहा- राणा का बाबर से हुआ था समझौता
उन्होंने कहा, यह समझौता हुआ था कि राणा सांगा आगरा पर हमला करेंगे। जब उनका समझौता टूट गया, तो फतेहपुर सीकरी में उनका युद्ध हुआ, राणा सांगा ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी, लेकिन हार गए। यह इतिहास है, इसे कौन नकार सकता है? करणी सेना के प्रमुख सूरज पाल सिंह अमू ने कहा कि सपा सांसद की इस टिप्पणी से मुगलों को हराने वाले नायक का अपमान हुआ है। उन्होंने सुमन और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की। (PTI Input)
