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सेबी प्रमुख के खिलाफ सांसद महुआ मोइत्रा की शिकायत जांच का आदेश देने के लिए अपर्याप्त: लोकपाल

SEBI Chief Madhavi Buch:तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने 13 सितंबर को एक्स पर पोस्ट में लिखा था कि उन्होंने सेबी प्रमुख के खिलाफ लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराई है।

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सेबी चीफ माधवी बुच।

SEBI Chief Madhavi Buch: सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच के खिलाफ लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा की शिकायत लोकपाल की जांच शुरू करने के लिए अपर्याप्त है। भ्रष्टाचार से जुडे मामलों की जांच करने वाले निकाय ने कहा कि अनुचित व्यवहार और हितों के टकराव के आरोप वाली शिकायत उसे जांच का आदेश देने के लिए राजी करने में विफल रही।

बता दें, अमेरिका स्थित हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग व्यक्तियों की दो शिकायतों पर फैसला करते हुए लोकपाल ने शिकायतकर्ताओं से हलफनामा दाखिल करने को कहा। इसमें इन शिकायतकर्ताओं को 10 अगस्त, 2024 को प्रकाशित हिंडनबर्ग रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में किए गए दावों की प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए उसके द्वारा किए गए प्रयासों का विवरण देना होगा। लोकपाल ने उनसे संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को स्पष्ट करने के लिए भी कहा, जो 20 सितंबर के लोकपाल के आदेश के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत भ्रष्टाचार का अपराध हो सकता है।

जांच के आदेश देने के लिए शिकायत अपर्याप्त

सांसद महुआ मोइत्रा की शिकायत पर विचार करते हुए लोकपाल ने कहा, शिकायत हमारे लिए पक्के तौर पर यह राय बनाने में विफल रही है कि लोकपाल अधिनियम 2013 की धारा 20 के अनुसार एक प्रथम दृष्टया मामला बनता है, जिसमें मामले में आगे बढ़ने के लिए प्रारंभिक जांच या जांच का निर्देश देने की जरूरत है। खासतौर से उन्हीं कारणों और तर्कों के लिए जो (पहली शिकायत में) बताए गए हैं। बता दें, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने 13 सितंबर को एक्स पर पोस्ट में लिखा था कि उन्होंने सेबी प्रमुख के खिलाफ लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराई है। लोकपाल ने इन मामलों को आगे विचार के लिए 17 अक्टूबर, 2024 को सूचीबद्ध किया है।

हिंडनबर्ग ने लगाए थे गंभीर आरोप

हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि बुच और उनके पति के पास कथित अदाणी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट विदेशी कोष में हिस्सेदारी थी। बुच और उनके पति ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि हिंडनबर्ग रिसर्च पूंजी बाजार नियामक की विश्वसनीयता पर हमला और चरित्र हनन का प्रयास कर रही है। अदाणी समूह ने भी हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और चुनिंदा सार्वजनिक सूचनाओं में हेरफेर करार दिया था। हिंडनबर्ग ने अदाणी पर अपनी पहली रिपोर्ट के 18 महीने बाद कहा था, सेबी ने अदाणी के मॉरीशस और विदेशी फर्जी संस्थाओं के कथित अघोषित जाल में आश्चर्यजनक रूप से रुचि नहीं दिखाई है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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