Mohan Bhagwat Address on RSS Vijayadashami Utsav event: विजयादशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सर संघचालक मोहन भागवत ने देश में समरसता एवं सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर बड़ा हमला किया। नागपुर स्थित संघ कार्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने मंगलवार को कहा कि 'कुछ लोग नहीं चाहते कि देश मजबूत हो। समाज में यदि बुराइयां रहेंगी तो वे सफल होंगे। ऐसे लोग समाज को तोड़ना चाहते हैं। ऐसे लोगों से हमें सजग रहने की जरूरत है।
आरएसएस प्रमुख ने मणिपुर का जिक्र किया
RSS मुख्यालय में शस्त्र पूजा करने के बाद भागवत ने कहा कि देश का उत्थान होगा तो शोषण खत्म होगा। उन्होंने मणिपुर में मैतेई एवं कैकी समुदाय के बीच हिंसक झड़पों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्षों से यह समुदाय एक-दूसरे के साथ रहते आया है लेकिन ऐसी क्या वजह है कि दोनों समुदाय एक-दूसरे के दुश्मन बन गए। यहां दोनों समुदायों के बीच समरसता बिगाड़ने की कोशिश हुई। इसके पीछे कोई है जो नहीं चाहता कि भारत में शांति बनी रहे।
जी-20 के सफल आयोजन से दुनिया में भारत का मान बढ़ा
विजयादशमी के पर्व पर लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने जी-20 के सफल आयोजन का जिक्र किया। भागवत ने कहा कि दुनिया में आज भारत का विशिष्ट स्थान बना है। आज भारत अग्रणी देशों में शामिल है। यह नेतृत्व की वजह से हुआ। हमारा देश सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। देश की आर्थिक स्थिति बेहदर हुई है। हम दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन गए हैं। स्टार्ट-अप के क्षेत्र में क्रांति हुई है। रक्षा से लेकर डिजिटल क्षेत्र में क्रांति हुई है। हम केवल भौतिक चीजों में आगे नहीं बढ़ रहे बल्कि हम अपनी विरासत एवं संस्कृति को भी आगे बढ़ा रहे हैं। जी-20 सम्मेलन की तारीफ आज दुनिया कर रही है। भागवत ने कहा कि एशियन गेम्स की सफलता से दुनिया में भारत का मान बढ़ा।
'देश भर के मंदिरों में कार्यक्रम का आयोजन करें'
उन्होंने कहा, 'अयोध्या में मंदिर बन रहा है। राम लला अपने घर में 22 जनवरी को प्रवेश करेंगे। भगवान राम करुणा के प्रतीक है। इस अवसर पर हमें देश भर के मंदिरों में समरसता, प्रेम और धार्मिकता का वातावरण बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए।' इससे पहले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महादेवन ने कहा कि 'दुनिया में शांति कायम करने का मंत्र भारतीय 'वसुधैव कुटुंबुकम' की भावना है। प्रत्येक मनुष्य की भलाई के लिए प्रार्थना...यही भारत है।'
