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'मां गंगा से मोदी सरकार ने किया धोखा...' खड़गे का सवाल- नमामि गंगे योजना की 55 फीसदी राशि क्यों नहीं हुई खर्च?

Mallikarjun Kharge Slams Modi Sarkar: नमामि गंगे योजना को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जन खड़गे ने मोदी सरकार पर गंभीर इल्जाम लगाए है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने सफाई के नाम पर मां गंगा से केवल धोखा किया। खड़गे ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए ये भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि मां गंगा के प्रति इतनी उदासीनता क्यों?

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नमामि गंगे योजना को लेकर मोदी सरकार पर कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल।

Congress vs BJP on Namami Gange Programme: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि ‘नमामि गंगे’ योजना के तहत आवंटित धन की 55 प्रतिशत राशि खर्च नहीं की गयी जो इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गंगा की सफाई की अपनी गारंटी भुला दी और सफाई के नाम पर मां गंगा को केवल धोखा दिया।

नमामि गंगे योजना पर कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल

मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, 'मोदी जी ने कहा था कि उनको 'मां गंगा ने बुलाया है' पर सच ये है कि उन्होंने गंगा सफ़ाई की अपनी गारंटी को भुलाया है।' उन्होंने कहा, 'क़रीब 11 वर्ष पहले, 2014 में, नमामि गंगे योजना शुरू की गई थी। नमामि गंगे योजना में मार्च 2026 तक 42,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया जाना था, पर संसद में दिए गए प्रश्नों के जवाब से पता चलता है कि दिसंबर, 2024 तक केवल 19,271 करोड़ रुपये ख़र्च हुए हैं। यानी मोदी सरकार ने नमामि गंगे योजना का 55 प्रतिशत धन ख़र्च ही नहीं किया।'

खड़गे ने पूछा- मां गंगा के प्रति इतनी उदासीनता क्यों?

कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि मां गंगा के प्रति इतनी उदासीनता क्यों? उन्होंने कहा, '2015 में मोदी जी ने हमारे एनआरआई साथियों से ‘स्वच्छ गंगा कोष’ में योगदान देने का आग्रह किया था। मार्च, 2024 तक इस इस कोष में 876 करोड़ रुपये दान दिए गए, पर इसका 56.7 प्रतिशत हिस्सा अब तक इस्तेमाल नहीं हुआ है। इस फंड का 53 प्रतिशत सरकारी उपक्रमों से दान लिया गया है।'

खड़गे ने दावा किया, ' नवंबर, 2024 में राज्य सभा में दिया गया एक उत्तर बताता है कि नमामि गंगे की 38 प्रतिशत परियोजनाएं अभी लंबित हैं। सीवेज ट्रीमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने के लिए कुल आवंटित धन का 82 प्रतिशत ख़र्च किया जाना था पर 39 प्रतिशत एसटीपी अभी भी पूरे नहीं हुए हैं और जो पूरे हुए हैं वो चालू ही नहीं हैं।' उनके मुताबिक, नवंबर 2024 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा की सफाई बनाए रखने में प्रशासन की विफलता पर कड़ी नाराजगी जताई थी तथा कड़ी फटकार लगाते हुए सुझाव दिया था कि नदी के किनारे एक बोर्ड लगाया जाए, जिसमें लिखा हो कि शहर में गंगा का पानी नहाने के लिए सुरक्षित नहीं है।

उन्होंने कहा, 'गंगा जीवनदायनी है। भारत की संस्कृति और उसकी आध्यात्मिक धरोहर है।' खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने गंगा सफ़ाई के नाम पर मां गंगा से केवल धोखा ही किया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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