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Modi Cabinet Reshuffle: मोदी मंत्रिमंडल में जल्द बड़ा फेरबदल? मानसून सत्र से पहले कई मंत्रियों की बदल सकती है भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में जल्द मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव संसद के मानसून सत्र से पहले या जुलाई के दौरान किया जा सकता है और इसे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के ऐलान के साथ जोड़ा जा सकता है। चर्चा है कि पार्टी संगठन और सरकार के बीच जिम्मेदारियों का नया संतुलन बनाया जाएगा, जिसमें कुछ केंद्रीय मंत्रियों को संगठन में और कुछ पार्टी पदाधिकारियों को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।

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मोदी सरकार में जल्द दिख सकता है नया समीकरण। PTI

Photo : PTI

Modi Cabinet Reshuffle: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की मंत्रिपरिषद में जल्द फेरबदल होने की संभावना प्रतीत हो रही है और सत्तारूढ़ दल के शीर्ष स्तर से मिल रहे संकेतों के अनुसार, यह फेरबदल अब कभी भी- संभवतः संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले किया जा सकता है। इस संबंधी विचार-विमर्श की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी की नयी टीम की घोषणा के साथ किया जाएगा।

युवा चेहरों को मिल सकती हैब बड़ी जिम्मेदारी

भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पदाधिकारियों की सूची को अंतिम रूप दे चुका है और ’नितिन नवीन की टीम’ की घोषणा जल्द होने की संभावना है। पार्टी के युवा चेहरों को संगठन में प्रमुख पदों की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष ने पिछले सप्ताह कुछ केंद्रीय राज्य मंत्रियों के साथ भी विचार-विमर्श किया था। इस बात की प्रबल संभावना है कि कुछ केंद्रीय मंत्रियों को भाजपा में संगठनात्मक भूमिकाएं संभालने के लिए भेजा जाएगा और पार्टी के पदाधिकारियों को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा।

धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर अनिश्चितता

कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जाने की भी अटकलें हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में अनियमितताओं सहित मंत्रालय से जुड़े कई विवादों के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

सूत्रों ने संकेत दिया कि अगर फेरबदल होता है तो यह जुलाई में कभी भी हो सकता है। संसद का मानसून सत्र आम तौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके छह से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी एक से तीन जुलाई तक नयी दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम है।

समीकरणों का रखा जाएगा ध्यान

सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः भाजपा की उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है।

'एक व्यक्ति, एक पद’ का पालन करेगी पार्टी

इस बात की प्रबल संभावना है कि भाजपा ’एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करेगी जिसके कारण दोनों को सरकार से हटना पड़ सकता है। दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया।

कुरियन अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जबकि बिट्टू अब भी मंत्री हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इन तीन राज्यों के और प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है।

शिवसेना के वरिष्ठ नेता को मिल सकती है कैबिनेट में जगह

ऐसी भी संभावना है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों में से एक या दो को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी गुटों के सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का कोई भी फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों के मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

प्रधानमंत्री मोदी की 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गईं।

इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं।

हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी। दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बी एल वर्मा का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा। अब यह देखना होगा कि उच्च सदन के लिए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है।

तीन राज्यपालों-कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह-का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है। गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में तथा सिंह का कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा। सरकार से हटाए जाने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दिए जाने की भी संभावना है। हालांकि, जानकार हलकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं और औपचारिक घोषणा होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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