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Modi cabinet Decisions: विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को मंजूरी, सहकारिता क्षेत्र में होगा बड़ा बदलाव

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 31, 2023, 04:26 PM IST

Modi cabinet Decisions: केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया, अभी देश में 1450 लाख टर्न खाद्यान्न के भंडारण की क्षमता है। इसके अतिरिक्त 700 लाख टन भंडारण की क्षमता सहकारिता क्षेत्र में शुरू होगी। इस पर करीब एक लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह योजना पहले 10 जिलों में शुरू होगी।

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केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर

Photo : ANI

Modi cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने आज विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया, आज कैबिनेट बैठक में सहकारिता क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े भंडारण योजना को कैबिनेट ने मंजूरी दी गई है। अभी देश में 1450 लाख टर्न खाद्यान्न के भंडारण की क्षमता है। इसके अतिरिक्त 700 लाख टन भंडारण की क्षमता सहकारिता क्षेत्र में शुरू होगी।

उन्होंने बताया, इस योजना के लिए सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में एक Empowered Inter-Ministerial कमेटी गठित होगी। इस योजना को शुरू करने में लगभग एक लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले 10 जिलों में लागू किया जाएगा।

पांच साल में 2150 लाख टन होगी क्षमता

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया, योजना के तहत अगले पांच सालों में अन्न भंडारण क्षमता को बढ़ाकर 2150 लाख टन किया जाएगा। उन्होंने कहा, इसके तहत प्रत्येक प्रखंड में 2000 टन क्षमता के गोदाम बनाए जाएंगे। योजना का मकसद भंडारण सुविधाओं की कमी से अनाज को होने वाले नुकसान से बचाना है। इसके अलासा किसानों को संकट के समय अपनी उपज को कम दाम पर बेचने से रोकना है। उन्होंने बताया, इस योजना के तहत गांवों में रोजगार के अवसर सृजित करना और आयात पर निर्भरता को कम करना भी सरकार का लक्ष्य है।

योजना से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा

केंद्रीय मंत्री ने बताया, इस योजना से देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। अभी देश में उपज का 47 प्रतिशत ही गोदामों में रखा जा सकता है, जबकि सालाना करीब 3100 लाख टन खाद्यान उत्पादन होता है। उन्होंने कहा, हर प्रखंड में अधिक अन्न भंडारण से किसानों के लिए परिवहन लागत में भी काफी कमी आएगी। इसके अलावा बैठक में सिटी इन्वेस्टमेंट्स टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेन - CITIIS 2.0 प्रोग्राम आज शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है। इस योजना के ऊपर करीब 1866 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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