खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय भारतीय खाद्य निगम में फैले भ्रष्टाचार से निपटने के लिए अधिकारियों की दखल को कम कर के तकनीकी का सहारा लेने पर विचार कर रहा हैं। मंत्रालय एफसीआई की गोदामों में ऑटो फूड ग्रेन एनालाइजर की मदद से अनाजों की गुणवत्ता पर नजर रखेगा। जिसकी वजह से मिलर, सप्लायर और एफसीआई के अधिकारियों के नेक्सस को तोड़ा जा सकेगा। पहले चरण में मंत्रालय एफसीआई के 50 गोदामों पर ये तकनीक लगाएगी। जिससे अनाज की गुणवत्ता के लिए अधिकारियों की सर्टिफिकेशन जरूरी नहीं होगा। जिसकी आड़ में अधिकारी मिलर से पैसा लेते थे।
नई मशीन ग्रेन में नमी से लेकर और भी पैरामीटर को रियल टाइम पर जानकारी देगी। जिसके ऑटो सर्टिफिकेशन के बाद किसी भी अधिकारी से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही इसके डेटा को सेंट्रली मोनिटरिंग किया जा सकेगा। एफसीआई के सभी गोदामों में फेज वाइज इसको लगाया जाएगा।
इसके अलावा मिलर और गोदाम के बीच में बेहतर कॉर्डिनेशन के लिए क्विक रेस्पॉन्स टीम का गठन किया जा रहा है। जो शिकायत को रियल टाइम पर हैंडल कर सके। वही गोदाम में स्टोरेज का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध होगा। जिससे सप्लायर और मिलर दोनों एक्सेस कर सकेंगे।
गौर हो कि हाल ही में सीबीआई के द्वारा एफसीआई के जीएम स्तर के अधिकारियों के ऊपर कर्रवाई के बाद मंत्रालय ने क्लास वन कैटेगरी के 4 अधिकारी, क्लास सेकेंड स्तर के 8 और क्लास थर्ड कैटेगरी के 13 अधिकारियों का ट्रांसफर भी किया था। साथ ही विभाग के भीतर फैले करप्शन के लिए नई विशिलब्लोअर पॉलिसी भी जारी की गई है। जिससे जरूरत पड़ने पर विभाग के भीतर से भी शिकायत मिलने पर उनका सही तरीके से करवाई हो सके।
