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सरकार ने अधिसूचित किए नागरिकता नियमों में बदलाव, नाबालिगों के दोहरे पासपोर्ट पर हुई सख्ती

बृहस्पतिवार को प्रकाशित राजपत्र अधिसूचना में सरकार ने बच्चों से संबंधित नागरिकता आवेदनों के लिए एक विशेष प्रावधान जोड़ा है कि 'नाबालिग बच्चा किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं रख सकता'।

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सरकार ने अधिसूचित किए नागरिकता नियमों में बदलाव।

Photo : PTI

MHA updates citizenship rules : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन अधिसूचित किए, जिसके तहत प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) कार्डधारकों और नागरिकता आवेदनों से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं में डिजिटल माध्यम का उपयोग शुरू किया गया है। बृहस्पतिवार को प्रकाशित राजपत्र अधिसूचना में सरकार ने बच्चों से संबंधित नागरिकता आवेदनों के लिए एक विशेष प्रावधान जोड़ा है कि 'नाबालिग बच्चा किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं रख सकता'।

ओसीआई कार्ड पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन होंगे

नए नियम, ’नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026’ के तहत अब ओसीआई कार्ड पंजीकरण और उसे छोड़ने के लिए आवेदन अब पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के जरिए होंगे। ओसीआई छोड़ने की घोषणा करने पर व्यक्ति को अपना मूल कार्ड निकटतम भारतीय मिशन, पोस्ट या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) के पास जमा करना होगा। सरकार द्वारा ओसीआई दर्जा रद्द किए जाने की स्थिति में भी कार्ड लौटाना अनिवार्य होगा। यदि कार्ड वापस नहीं किया जाता है, तब भी सरकार उसे आधिकारिक रूप से रद्द कर सकती है।

'डुप्लिकेट’ प्रति जमा करने की अनिवार्यता खत्म

ई-ओसीआई धारकों के मामले में सरकार अपने रिकॉर्ड में डिजिटल पंजीकरण रद्द कर सकती है। नए नियमों में दस्तावेजों की 'डुप्लिकेट’ प्रति जमा करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और ई-ओसीआई व्यवस्था शुरू की गई है, जिसके तहत आवेदकों को भौतिक ओसीआई कार्ड दिया जा सकता है या डिजिटल रूप में ओसीआई पंजीकरण किया जा सकता है। नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि ओसीआई या नागरिकता आवेदन खारिज होता है, तो उसे चुनौती देने का अधिकार होगा। ऐसे मामलों की समीक्षा अब मूल निर्णय लेने वाले अधिकारी से "एक स्तर ऊपर के प्राधिकारी" द्वारा की जाएगी।

    2005 में लागू हुई ओसीआई योजना

    ओसीआई योजना को 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के माध्यम से लागू किया गया था। यह योजना भारतीय मूल के व्यक्तियों को भारत के प्रवासी नागरिक के रूप में पंजीकृत करने का प्रावधान करती है, बशर्ते वे 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत के नागरिक रहे हों, या उस तिथि को नागरिकता प्राप्त करने के पात्र रहे हों। हालांकि, वे व्यक्ति जो पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक हैं या रहे हैं, या जिनके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक थे, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

    Alok Rao
    आलोक कुमार रावauthor

    19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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