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Mathura: श्री कृष्ण भूमि-शाही ईदगाह विवाद मामला, हाईकोर्ट ने खारिज की मुस्लिम पक्ष की रिकॉल अर्जी

Mathura: श्री कृष्ण भूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की रिकॉल अर्जी खारिज कर दी है। मुस्लिम पक्ष ने 11 जनवरी 2024 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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मथुरा मंदिर-मस्जिद विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।

Shri Krishna Bhoomi-Shahi Idgah dispute: श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद मुस्लिम पक्ष की रिकॉल याचिका को खारिज कर दिया गया। इस याचिका के खारिज होने के बाद हिंदूवादी नेताओं ने एक दूसरे को मिठाई जश्न मनाया।

हिंदू पक्ष के वकील ने जताई कड़ी आपत्ति

मुस्लिम पक्ष ने अपनी याचिका में कहा था कि सभी मुकदमों की सुनवाई अलग-अलग की जाए, मुस्लिम पक्ष की तरफ से एडवोकेट तस्लीम अहमदी ने कहा था कि जब सभी मुकदमों का उद्देश्य अलग अलग है, तो सभी के मुकदमा की सुनवाई है, एक साथ क्यों हो रही है। इस पर हिंदू पक्ष तरफ से एडवोकेट सत्यवीर सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि मुस्लिम पक्ष सभी मुकदमों को अलग-अलग सुनवाई करा कर मामले को इन केसों को लंबा खींचना चाहता है, न्यायालय का समय बर्बाद करना चाहता है।

'जल्द फैसला हो और दूध का दूध पानी का पानी हो जाए'

हिंदू पक्ष का कहना है कि सभी मुकदमा की सुनवाई एक साथ होनी चाहिए। हिंदू पक्ष के मुख्य याचिका करता दिनेश शर्मा फलाहारी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास कोई भी साक्ष्य नहीं है, जिससे यह मामले को लम्बा खींचना चाहता है, लेकिन हिंदू पक्ष चाहता है कि जल्द से जल्द फैसला हो जाए और दूध का दूध पानी का पानी अलग हो जाए।

हिंदू पक्ष ने पहले ही अपने मंदिर के प्राचीन साक्ष्य न्यायालय जमा कर दिए हैं, मंदिर की खसरा खतौनी, नकल पुरानी खेबट की नकल, नगर निगम का असेसमेंट रेलवे का मुआवजा, जमीन की रजिस्ट्री, जमीन का नक्शा आदि सभी साक्ष्य न्यायालय में जमा कर दिए हैं।

'मुस्लिम पक्ष के पास में एक भी कागज का टुकड़ा नहीं'

दिनेश शर्मा ने बताया कि पूजा उपासना अधिनियम 1991, लिमिटेशन एक्ट और वक्फ बोर्ड एक्ट पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के मध्य में लगभग 4 महीने तक बहस को सुना, सुनने के बाद में न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय दिया था, जिसमें न्यायालय ने स्वीकार किया के सभी मुकदमे सुनवाई योग्य हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय सबूत के आधार पर फैसला करता है, मुस्लिम पक्ष के पास में एक भी कागज का टुकड़ा नहीं है जो यह साबित कर सके कि यह मस्जिद,मंदिर से पहले बनी थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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