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'तन-मन और धन से सुखी रहौ...' न्यूजीलैंड की बूढ़ी अम्मा ने PM Modi को दिया आशीर्वाद

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 1, 2023, 04:11 PM IST

Mann ki Baat 100th Episode: 100 वर्षीय रामबेन ऑकलैंड में प्रवासी भारतीयों के साथ मन की बात कार्यक्रम सुन रही थीं। इसी दौरान वह पीएम मोदी की तस्वीर के पास गईं, और उसे छूते हुए उन्हें खूब आशीर्वाद दिया।

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रामबेन ने पीएम मोदी को दिया आशीर्वाद (स्क्रीन ग्रैब)

Photo : ANI

Mann ki Baat 100th Episode: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 100वें एपिसोड का रेडियो प्रसारण ऐतिहासिक रहा। भाजपा ने देश के करीब चार लाख स्थानों पर इस कार्यक्रम को सुनने की व्यवस्था की थी। इसके अलाव विदेशों में भी इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया। अब पीएम के मन की बात कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है।

यह वीडियो न्यूज़ीलैंड से आया है, जहां 100 वर्षीय रामबेन ऑकलैंड में प्रवासी भारतीयों के साथ मन की बात कार्यक्रम सुन रही थीं। इसी दौरान वह पीएम मोदी की तस्वीर के पास गईं, और उसे छूते हुए उन्हें खूब आशीर्वाद दिया।

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रामबेन ने पीएम को आशीर्वाद देते हुए कहा, 'तुम तन-मन और धन से खूब खुश रहौ...'

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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