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करीब दो महीने बाद आठ घंटे के लिए घर लौटे मनीष सिसोदिया, बीमार पत्नी से नहीं हो पाई मुलाकात

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 3, 2023, 12:15 PM IST

Delhi Liquor Policy Case: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उनकी यहां अपनी पत्नी से मुलाकात नहीं हो पाई। दरअसल, सिसोदिया के घर पहुंचने से पहले उनकी पत्नी की तबीयत काफी बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। चूंकि कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को सिर्फ घर पर पत्नी से मुलाकात करने की इजाजत दी है।

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Manish Sisodia

Photo : BCCL

Delhi Liquor Policy Case: शराब नीति घोटाले में फंसे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने आठ घंटे की अंतरिम बेल दी है। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आज सुबह सिसोदिया अपनी बीमार पत्नी से मिलने अपने घर पहुंचे हैं। बता दें, मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था। वह करीब दो महीने बाद अपने घर पहुंचे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, मनीष सिसोदिया सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक अपनी पत्नी से मिल सकते हैं। हालांकि, इस दौरान उन्हें मीडिया से बात करने की इजाजत नहीं है। सिसोदिया को सिर्फ अपने परिवार वालों से मिलने की इजाजत दी गई है।

पत्नी से नहीं हो पाई मुलाकात

दिल्ली पुलिस की कड़ी सुरक्षा में मनीष सिसोदिया को शनिवार सुबह उनके घर लाया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उनकी यहां अपनी पत्नी से मुलाकात नहीं हो पाई। दरअसल, सिसोदिया के घर पहुंचने से पहले उनकी पत्नी की तबीयत काफी बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। चूंकि कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को सिर्फ घर पर पत्नी से मुलाकात करने की इजाजत दी है। ऐसे में वह अस्पताल नहीं जा पाए। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की सुरक्षा में सिसोदिया शाम पांच बजे तक अपने घर पर ही रहेंगे, इसके बाद उन्हें वापस जेल ले जाया जाएगा।

इन शर्तों पर मिली इजाजत

जेल में बंद मनीष सिसोदिया को पत्नी के मेडिकल आधार पर आठ घंटे की मोहलत दी गई है। इस दौरान वह न तो मीडिया से बात करेंगे और न ही इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे। सिसोदिया सिर्फ अपने परिवार के लोगों से मिल सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें शनिवार शाम तक पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। बता दें, ईडी मामले में मनीष सिसोदिया की अगली सुनवाई 19 जुलाई को होनी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी पर भी कोर्ट का फैसला आना है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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