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पूरे 17 महीने बाद AAP कार्यालय पहुंचे मनीष सिसोदिया, बोले- 'BJP का काल अभी जेल में है'

Manish Sisodia Address at AAP office: ​​मनीष सिसोदिया ने जेल से बाहर आते ही भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा हमला किया। उन्होंने कहा, भाजपा वालों ने मुझे और हमारे नेताओं को जेल में डालकर सड़ाने की कोशिश की, लेकिन ये आपको आंसुओं की कीमत है। ईमानदारी और सच्चाई की जीत हुई है।

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मनीष सिसोदिया।

Photo : Twitter

Manish Sisodia Address at AAP office: आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया 17 महीने बाद जेल से रिहा होने के बाद आज पार्टी ऑफिस पहुंचे। इस दौरान आप कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान केजरीवाल ने ईडी-सीबीआई को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला।

इस दौरान मनीष सिसोदिया ने कहा, ईडी और सीबीआई का तानाबान इसलिए नहीं बुना गया कि कोई बेईमानी हो गई है। यह इसलिए बुना गया है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक किसी चाय के ढाबे से रुके हुए 10 लोगों से बात करोगे तो लोग बोलेंगे कि केजरीवाल दिल्ली में काम बड़ी ईमानदारी से कर रहा है। उन्होंने कहा, केजरीवाल का नाम ईमानदारी का प्रतीक बन गया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद एक भी राज्य में ईमानदारी से काम करने का उदाहरण नहीं पेश कर पाई। उन्होंने का केजरीवाल की ईमानदारी की छवि को बिगाड़ने के लिए सारे कुचक्र और सारे षडयंत्र रचे जा रहे हैं। सिसोदिया ने आगे कहा कि कहा, सारे भ्रष्टाचारियों को इकट्ठा करके भारतीय जनता पार्टी को इतनी बड़ी पार्टी बनाया गया है, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि तुम्हारा काल अभी जेल में है और उसे बहुत दिनों तक अंदर नहीं रख पाओगे।

आपके आंसुओं ने मुझे ताकत दी

सिसोदिया ने कहा, पूरे 17 महीने आपके आंसुओं ने ही मुझे ताकत दी है। मैं जब राजघाट से आप लोगों से बात करके गया था तो मैं कहा था कि 7-8 महीने लगेंगे, लेकिन 17 महीने लग गए और जीत ईमानदारी की ही हुई। उन्होंने कहा, भाजपा के लोगों ने मुझ पर, पार्टी नेताओं पर ऐसी धाराएं लगाने की कोशिश की जो आतंकवादियों, ड्रग माफियाओं पर लगाई जाती हैं। भाजपा वालों ने सोचा कि संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को जेल में डाल दो, ये लोग सड़ जाएंगे, लेकिन ये आपके आंसुओं की कीमत है।

खून-पसीना बहाने के लिए बाहर आया हूं

मनीष सिसोदिया ने कहा, मैं खून-पसीना बहाने के लिए बाहर आया हूं, न कि छुट्टियां मनाने के लिए। उन्होंने कहा, हमें आज से लगना होगा और तानाशाही के खिलाफ एक-एक आदमी को वोट करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, यह लड़ाई सिर्फ आम आदमी पार्टी और विपक्षी पार्टियों की नहीं है, यह लड़ाई हर आदमी की है। सिसोदिया ने कहा, बीजेपी वालों की जमानत जब्त कराएंगे, ये एक-एक वोट ढूंढते रह जाएंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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