Congress vs BJP: कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि मणिपुर विधानसभा का प्रस्तावित सत्र रद्द कर दिया गया क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नया मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल भी किया कि राज्यपाल अजय कुमार भल्ला विधानसभा का सत्र नहीं बुलाकर अनुच्छेद 174(1) का उल्लंघन क्यों कर रहे हैं?
12वीं विधानसभा के सातवें सत्र को किया गया रद्द
मणिपुर में 10 फरवरी से शुरू होने वाले 12वीं विधानसभा के सातवें सत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। विधानसभा सचिव के. मेघजीत सिंह द्वारा रविवार को जारी एक नोटिस से यह जानकारी मिली। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, 'मणिपुर विधानसभा के सत्र की संवैधानिक रूप से अनिवार्य बैठक का आज आखिरी दिन है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 (1) में प्रावधान है कि विधानसभा सत्र की अंतिम बैठक और अगले विधानसभा सत्र की पहली बैठक के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता है।'
उन्होंने सवाल किया, 'मणिपुर के राज्यपाल अपने संवैधानिक रूप से अनिवार्य विधानसभा सत्र के लिए मणिपुर विधानसभा की बैठक को न बुलाकर अनुच्छेद 174(1) का उल्लंघन क्यों कर रहे हैं?' रमेश ने दावा किया कि सत्र को अमान्य घोषित कर दिया गया क्योंकि भाजपा मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं कर सकी जिसके खिलाफ कांग्रेस कल अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी, जिसके कारण रविवार रात मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
असम में भाजपा के दिग्गज नेताओं की बैठकों का दौर जारी
मणिपुर के मंत्री वाई खेमचंद ने एक दिन पहले कहा था कि राज्य में नेतृत्व संकट को हल करने के लिए पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, भाजपा नेता उसका पालन करेंगे। खेमचंद ने यह बयान भाजपा के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा द्वारा यहां एक होटल में पार्टी के कई विधायकों के साथ बंद कमरे में बैठक किए जाने के तुरंत बाद दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पात्रा ने विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यब्रत, शिक्षा मंत्री थौनाओजम बसंत कुमार सिंह, भाजपा विधायक टी. राधेश्याम और नगरपालिका प्रशासन एवं आवास विकास मंत्री खेमचंद से अलग-अलग मुलाकात की थी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मणिपुर इकाई में बढ़ते असंतोष और नेतृत्व परिवर्तन की मांग के बीच एन बीरेन सिंह ने रविवार को राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। राज्यपाल ने उनके तथा उनकी मंत्रिपरिषद के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया था तथा उनसे वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया था। खेमचंद ने मीडिया से कहा, 'आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, हम उसे स्वीकार करेंगे। समस्या समाप्त हो गई है। अब ध्यान इस बात पर है कि शांति कैसे बहाल की जाए।'
सूत्रों ने बताया कि भाजपा विधायक अगले 48 घंटों में इंफाल या अन्य जगहों पर स्थिति पर चर्चा करने के लिए और बैठकें कर सकते हैं। इस बीच, राज्य की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
