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कौन बनेगा NHRC का अगला अध्यक्ष? पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुआ मंथन; राहुल गांधी भी रहे मौजूद

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का अगला अध्यक्ष कौन बनेगा? चयन के लिए बैठकों का दैर जारी है। इसी बीच एनएचआरसी के नए अध्यक्ष के चयन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक हुई। जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए।

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NHRC के नए अध्यक्ष के लिए बैठक।

NHRC New Chief: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक समिति ने बुधवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अगले अध्यक्ष का चयन करने के लिए बैठक की। सूत्रों ने यह जानकार दी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी नेता राहुल गांधी क्रमशः राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में बैठक में शामिल हुए।

एक जून से रिक्त है एनएचआरसी अध्यक्ष का पद

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा का कार्यकाल एक जून को पूरा होने के बाद से एनएचआरसी अध्यक्ष का पद रिक्त है। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मिश्रा ने अधिकारों की पैरवी करने वाले निकाय के आठवें अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और जून 2021 में उन्हें इसके शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया।

इस बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?

एनएचआरसी को नियंत्रित करने वाले कानून के अनुसार, निकाय के प्रमुख का चयन करने वाली समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, तथा लोकसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और राज्यसभा के उपसभापति इसके सदस्य होते हैं। न्यायमूर्ति मिश्रा के पद छोड़ने के बाद एनएचआरसी की सदस्य विजया भारती सयानी इसकी कार्यवाहक अध्यक्ष बनीं।

चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश या शीर्ष न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को एनएचआरसी का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है। पूर्व प्रधान न्यायाधीश एच.एल. दत्तू और के.जी. बालाकृष्णन उन लोगों में से हैं जो अतीत में आयोग का नेतृत्व कर चुके हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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