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तथाकथित सेक्यूलर दल ही माफिया को दे रहे बढ़ावा, महेश जेठमलानी ने NCP-D गैंग का किया जिक्र

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Apr 20, 2023, 10:22 AM IST

बीजेपी के राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने अतीक अहमद मर्डर केस के बारे में कहा कि जिस तरह से एनसीपी और डी गैंग में गठजोड़ था। कुछ उसी तरह से तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल अतीक अहमद कंपनी की मदद करते रहे हैं।

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महेश जेठमलानी, राज्यसभा सांसद

KEY HIGHLIGHTS
  • अतीक अहमद-अशरफ की 15 अप्रैल को हुई थी हत्या
  • तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल कर रहे हैं राजनीति
  • बीजेपी राज्यसभा सांसद हैं महेश जेठमलानी

Atique Ahmed News: अतीक अहमद के मुद्दे पर विरोधी दल बीजेपी पर हमलावर हैं, एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी(Asaduddin owaisi) ने कहा था कि आखिर खास समाज के लोगों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि एक तरफ योगी आदित्यनाथ सरकार अपराधमुक्त यूपी का दावा कर रही है दूसरी तरफ दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है। इस तरह के आरोपों पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद महेश(BJP MP Mahesh Jethmalani) जेठमलानी ने एक खास प्रसंग एनसीपी और डी कंपनी के बीच कनेक्शन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों ने माफियाओं को पाला और उन्हें जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया।

अतीक का मारा जाना धर्म से रिश्ता नहीं

महेश जेठमलानी ने कहा कि बीजेपी और शिवसेना की सरकार ने 2015 से ही इनके गठजोड़ को खत्म करने की कार्रवाई शुरू की। प्रयागराज में अतीक हत्याकांड में उसके किसी दुश्मन या पीड़ित का हाथ हो सकता है। इसे धार्मिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। अगर आप देखें तो 2015 में देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने हिंदू समाज से जुड़े सबसे बड़े डॉन छोटा राजन को सलाखों के पीछे पहुंचाया था। अतीक अहमद जैसे लोग लगातार आपराधिक गतिविधियों में इसलिए शामिल हो पाते हैं क्योंकि राजनीतिक दल उन्हें संरक्षण देते हैं जो बदले में उन्हें सुरक्षा और फायदा पहुंचाते हैं।

15 अप्रैल को हुई थी हत्या

उमेश पाल हत्याकांड के दोनों आरोपी अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की 15 अप्रैल को उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई जब उन्हें मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा था. 13 अप्रैल को इसी मामले में एक अन्य आरोपी अतीक अहमद का बेटा असद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। जैसा कि पुलिस हिरासत में आश्चर्यजनक गोलीबारी के बाद हुई मुठभेड़ ने कई सवाल खड़े किए। जेठमलानी ने कहा कि अतीक 2004 से 2018 तक समाजवादी पार्टी के सदस्य थे। जब समाजवादी पार्टी सत्ता में आई, तो उन्हें 2012 में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।यह केवल तब था जब योगी सरकार सत्ता में आई थी कि उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया था और अंततः 2019 में 2006 में अनमेश पाल के अपहरण के लिए दोषी ठहराया गया था। यह योगी सरकार भी थी जिसने उनकी अवैध कमाई के 11000 करोड़ रुपये कुर्क करके उनके वित्तीय दबदबे को खत्म कर दिया था। उनकी संपत्ति छीन ली गई, उनके पास उद्योगपतियों/रियल एस्टेट डेवलपर्स के एक मेजबान से धन उगाहने और वकील उमेश पाल की हत्या की साजिश रचने का दुस्साहस था, जो 2006 में राजू पाल की हत्या में उनके खिलाफ मुख्य चश्मदीद गवाह था, जिसमें दुस्साहस ने उनके बेटे की जान ले ली थी।

ललित राय
ललित राय author

खबरों को सटीक, तार्किक और विश्लेषण के अंदाज में पेश करना पेशा है। पिछले 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव है।और देखें

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