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महाराष्ट्र में 1.2 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का आरोप, 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगा Supreme Court

महाराष्ट्र में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। याचिका में 1.2 करोड़ मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों के आधार पर चिह्नित करने का दावा है।

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महाराष्ट्र SIR के मुद्दे पर 26 अक्टूबर को होगी सुनवाई

महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगा है। इस मामले में आज यानी गुरुवार 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका का जिक्र किया गया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र में कुल 9.79 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 1.2 करोड़ मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी तार्किक विसंगतियों के आधार पर चिह्नित किया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुणे और कुछ अन्य इलाकों में 40.6 फीसदी मतदाता मतदाता सूची से बाहर रह गए हैं।

SIR के सभी मामलों की एक साथ सुनवाई की मांग

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने अनुरोध किया कि महाराष्ट्र में SIR से जुड़ी याचिका पर भी उन आज लिस्टेड याचिकाओं के साथ कि जाए। हालांकि, CJI सूर्यकांत ने सभी राज्यों से जुड़े SIR विवादों को एक साथ देखने के अनुरोध पर कहा कि इन मामलों को सामान्य रूप से एक ही श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत राज्यवार तरीके से इन मुद्दों पर विचार करना चाहती है।

CJI ने कहा, 'इसे सामान्यीकृत नहीं किया जा सकता। हमें राज्यवार तरीके से देखना होगा। हमें महाराष्ट्र पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके बाद हमें फिर दिल्ली से जुड़े मुद्दों पर जाना होगा।' इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र से जुड़े मामले को दूसरी SIR याचिकाओं के साथ उसी दिन सुनने के बजाय 26 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

दिल्ली में भी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

महाराष्ट्र का मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली में भी SIR की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। RTI कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और एक अन्य याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग की उस व्यवस्था को चुनौती दी है, जिसके तहत दिल्ली की प्रारूप मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए नए सिरे से फॉर्म-6 भरकर आवेदन करना होगा।

याचिका में इस प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने महाराष्ट्र और दिल्ली से जुड़े SIR के अलग-अलग मुद्दे हैं, जिन पर अदालत राज्यवार तरीके से विचार करना चाहती है।

फिलहाल महाराष्ट्र मामले में 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और तार्किक विसंगतियों के आधार पर मतदाताओं को चिह्नित किए जाने से संबंधित आंकड़े याचिका में लगाए गए आरोप हैं। इन दावों पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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