महाराष्ट्र में एक तरफ सूखे की मार से किसान परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ जालना में आयोजित एक भजन कार्यक्रम का मामला चर्चा में है। यहां भाजपा के पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल पर नोट उड़ाए गए। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं के आग्रह पर गोरंट्याल ने ‘मैं हूं डॉन’ गाने पर डांस भी किया। घटना सामने आने के बाद सूखे और किसानों की बदहाली के बीच इस तरह नोट उड़ाए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
यह कार्यक्रम जालना शहर के मंमादेवी मंदिर परिसर में आयोजित किया गया था। हालांकि, कार्यक्रम में उड़ाए गए नोटों की कुल राशि और घटना को लेकर संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया की पुष्टि होना बाकी है।
महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश की कमी के कारण खेती पर संकट गहराया हुआ है। राज्य सरकार ने प्रदेश की 358 तहसीलों में से 305 तहसीलों में सूखा घोषित किया है। सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए सरकार की तरफ से विभिन्न उपायों की घोषणा भी की गई है।
बारिश की कमी का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ा है। खेतों में खड़ी फसलें सूखने से किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई जगहों पर हालात ऐसे हो गए हैं कि किसानों को अपनी खराब हो चुकी फसलों पर रोटावेटर चलाना पड़ा है। फसल तैयार होने से पहले ही बर्बाद हो जाने के कारण किसानों की मेहनत और खेती पर किया गया खर्च भी प्रभावित हुआ है।
जालना में भजन कार्यक्रम के दौरान क्या हुआ
जालना शहर के मंमादेवी मंदिर परिसर में भजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम में बीजेपी के पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान उन पर नोट उड़ाए गए। बताया गया कि कार्यकर्ताओं ने गोरंट्याल से डांस करने का आग्रह किया, जिसके बाद वह ‘मैं हूं डॉन’ गाने पर थिरकते नजर आए। कार्यक्रम का यह घटनाक्रम सामने आने के बाद इसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में भी होने लगी।
किसानों की परेशानी के बीच उठ रहे सवाल
महाराष्ट्र में सूखे के कारण किसानों को अपनी फसलें बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे समय में सूखाग्रस्त क्षेत्र के एक कार्यक्रम में नेता पर नोट उड़ाए जाने की घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नोट उड़ाए जाने की घटना अपने आप में किसी नियम के उल्लंघन या गलत मंशा का प्रमाण नहीं है। इस मामले में कार्यक्रम के आयोजकों और संबंधित पक्षों का रुख सामने आने के बाद तस्वीर और साफ हो पाएगी।
फिलहाल, जालना का यह मामला सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र में किसानों की मुश्किलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में नेताओं के व्यवहार को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
