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चाचा-भतीजे की मुलाकात, अजित पवार से किन मुद्दों पर हुई बात? शरद पवार ने बताया सबकुछ

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत में चाचा और भतीजे की लड़ाई किसी से नहीं छिपी है। इसी बीच शरद पवार और अजित पवार की मुलाकात हुई है। जिसके बारे में शरद ने बताया है कि पुणे में अजित के साथ बैठक में पार्टी से संबंधित किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। आपक बताते हैं कि आखिर पूरा माजरा क्या है।

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शरद पवार और अजित पवार।

Chacha vs Bhatija: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को पुणे में अपने भतीजे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ बंद कमरे में हुई बैठक को ज्यादा तवज्जो नहीं देने का प्रयास किया और कहा कि दोनों पार्टियों से संबंधित किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने कोल्हापुर शहर में पत्रकारों से बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बैठक में चर्चा पूरी तरह से चीनी उद्योग परियोजना पर केंद्रित थी।

क्या फिर एकसाथ आने वाले हैं अजित पवार और शरद पवार?

यह पूछे जाने पर कि उनके और अजित पवार के नेतृत्व वाले राकांपा के प्रतिद्वंद्वी गुटों के एक साथ आने की संभावना क्या है, और क्या बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई, वरिष्ठ राजनेता ने कहा कि पार्टी से संबंधित किसी भी मामले पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा, “बैठक में अजित पवार, मैं और (चीनी उद्योग) परियोजना से जुड़े लोग मौजूद थे।" दोनों राजनीतिक नेता वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआई) की वार्षिक आम सभा की बैठक में भाग लेने के लिए पुणे में थे, जिसके अध्यक्ष शरद पवार हैं।

अजित पवार बोले- मैं शरद पवार से कभी भी बात कर सकता हूं

उपमुख्यमंत्री अजित पवार पुणे स्थित वीएसआई के सदस्य हैं, जो चीनी उद्योग से जुड़ा एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है और वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में जुलाई 2023 में हुए विभाजन के बाद पहली बार इसकी वार्षिक आम सभा (एजीएम) की बैठक में शामिल हुए। एजीएम के दौरान अजित पवार अपने चाचा से दूर बैठे, जो विपक्षी राकांपा (एसपी) के प्रमुख हैं। शुरुआती व्यवस्था के अनुसार दोनों को एक-दूसरे के बगल में बैठना था। सत्तारूढ़ राकांपा का नेतृत्व करने वाले उप-मुख्यमंत्री ने अपनी नाम पट्टिका को एक कुर्सी दूर कर दिया, जिससे महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल उनके बीच बैठ गए।

बैठने की व्यवस्था में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर शरद पवार ने स्पष्ट किया कि बाबासाहेब पाटिल कार्यक्रम के दौरान कुछ खास बातें बोलना चाहते थे और इसीलिए वह (राज्य मंत्री) उनके (शरद पवार के) बगल में बैठे थे। अजित पवार ने भी इसी तरह का स्पष्टीकरण दिया। उपमुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को बैठने की व्यवस्था में फेरबदल के बारे में पूछे जाने पर बताया, “बाबासाहेब (शरद) पवार साहेब से बात करना चाहते थे। मैं उनसे (शरद पवार से) कभी भी बात कर सकता हूं। अगर मैं एक कुर्सी दूर भी बैठूं तो मेरी आवाज इतनी तेज है कि दूर बैठा कोई भी सुन सकेगा।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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