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महाराष्ट्र में शिवाजी की नई प्रतिमा स्थापित करेगी सरकार, विपक्ष के हंगामे के बाद फडणवीस ने किया बड़ा ऐलान

Maharashtra Shivaji Statue Collapse News: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग की मालवण तहसील के राजकोट किले में शिवाजी की 35 फुट ऊंची प्रतिमा ढह गई थी। इसके बाद सरकार ने उसी जगह पर इससे भी ऊंची नई प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान किया है।

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शिवाजी महाराज की नई प्रतिमा स्थापित करेगी महाराष्ट्र सरकार।

Maharashtra Shivaji Statue Collapse: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढहने के बाद हंगामा जारी है। विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। इस बीच सरकार की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा है कि राज्य सरकार ने अब उसी स्थान पर मराठा योद्धा की एक विशाल प्रतिमा स्थापित करने का फैसला किया है।

बता दें, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल चार दिसंबर को नौसेना दिवस पर सिंधुदुर्ग की मालवण तहसील के राजकोट किले में शिवाजी की 35 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया था। यह प्रतिमा सोमवार दोपहर को ढह गयी थी, जिसके बाद उद्धव सेना ओर कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सरकार ने नहीं, नौसेना ने बनाई थी प्रतिमा

फडणवीस ने कहा, शिवाजी महाराज की प्रतिमा के निर्माण की देखरेख राज्य सरकार ने नहीं बल्कि नौसेना ने की थी। प्रतिमा के निर्माण और स्थापना के लिए जिम्मेदार लोगों ने महत्वपूर्ण स्थानीय कारकों जैसे कि तीव्र हवा गति और इसमें इस्तेमाल लोहे की गुणवत्ता को नजरअंदाज कर दिया होगा। समुद्र से उठने वाली हवाओं के संपर्क में आने के कारण प्रतिमा में जंग लगने का खतरा अधिक होगा। उन्होंने कहा, अब सवाल यह है कि क्या प्रतिमा के निर्माताओं ने इन सभी कारकों को समझा था? हमारा संकल्प उसी स्थान पर छत्रपति शिवाजी महाराज की और बड़ी प्रतिमा बनाने का है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा ढहने की घटना की जांच की जा रही है।

विपक्ष को राजनीति करने की जरूरत नहीं

इस घटना को लेकर विपक्षी दलों द्वारा निशाना साधे जाने के बारे में पूछने पर फडणवीस ने कहा, प्रतिमा का गिरना दुखद है लेकिन इस पर विपक्षी दलों का रुख उचित नहीं है। इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोई जरूरत नहीं है। बता दें, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रतिमा गिरने के बाद सोमवार को दावा किया कि प्रति घंटे 45 किलोमीटर की गति से चली हवा के कारण यह घटना हुई। विपक्षी दलों ने यह कहते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इस प्रतिमा को जल्दबाजी में स्थापित किया गया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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