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महाराष्ट्र में विधानसभ चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल राकांपा(एसपी) में शामिल

Maharashtra News: इंदापुर से चार बार विधायक चुने जा चुके हर्षवर्धन पाटिल इस सीट से फिर से चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक हैं। इस सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा की गठबंधन सहयोगी राकांपा करती है, जो इस बार फिर से मौजूदा विधायक दत्तात्रेय भरणे को मैदान में उतार सकती है।

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शरद पवार की पार्टी में शामिल हुए हर्षवर्धन पाटिल।

Maharashtra News: महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ने के कुछ दिनों बाद सोमवार को विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) में शामिल हो गए। पाटिल को पार्टी प्रमुख शरद पवार की मौजूदगी में राकांपा (एसपी) में शामिल किया गया।

पाटिल ने कहा कि उनके समर्थक चाहते हैं कि वह महाराष्ट्र के आगामी विधानसभा चुनाव में इंदापुर सीट (पुणे जिले में) से लड़ें, जहां से वह पहले प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दल से अधिक लोग महत्वपूर्ण हैं। बता दें, पाटिल वर्तमान में राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल संघ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने पिछले सप्ताह भाजपा छोड़ दी थी। इंदापुर बारामती लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

शरद पवार से हुई थी मुलाकात

भाजपा से इस्तीफा देने के बाद हर्षवर्धन पाटिल ने तीन अक्टूबर को मुंबई में राकांपा (एसपी) प्रमुख से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा कि शरद पवार ने उनसे अपनी पार्टी में शामिल होने तथा आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का आग्रह किया। अटकलें लगाई जा रही थीं कि पटिल पार्टी बदल सकते हैं, खासकर जब से राकांपा के नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा था कि पिछले बार जो सीट जीते थे उन्हें चुनाव लड़ाया जाएगा।

चार बार विधायक रह चुके हैं हर्षवर्धन पाटिल

इंदापुर से चार बार विधायक चुने जा चुके पाटिल इस सीट से फिर से चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक हैं। इस सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा की गठबंधन सहयोगी राकांपा करती है, जो इस बार फिर से मौजूदा विधायक दत्तात्रेय भरणे को मैदान में उतार सकती है। हर्षवर्धन पाटिल 1995-99 के दौरान शिवसेना-भाजपा गठबंधन सरकार में कृषि और विपणन राज्य मंत्री रहे। उन्होंने 1995 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता। वह 1999 से 2014 तक कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार के दौरान मंत्री पद पर रह चुके हैं। वह 2009 में कांग्रेस में शामिल हुए और सहकारिता और विधायी मामलों के मंत्री बनाए गए।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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