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'श्रीमान बंटाधार' और 'करप्शन नाथ'..., कांग्रेस पर कुछ ऐसे तीखे हमले कर गए अमित शाह

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 30, 2023, 06:51 PM IST

Amit Shah in Indore: भाजपा ने राज्य में 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान उमा भारती की अगुवाई वाले प्रचार अभियान में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ श्रीमान बंटाधार शब्द का इस्तेमाल किया था, जबकि पिछले महीने राज्य में अज्ञात लोगों द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर कमलनाथ की तस्वीर के साथ करप्शन नाथ के संबोधन का उपयोग किया गया था।

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अमित शाह

Photo : Twitter

Amit Shah in Indore: मध्यप्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की तरफ से एक-दूसरे पर हमले तेज हो गए हैं। रविवार को इंदौर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भाजपा के चुनाव अभियान की बिगुल फूंक दी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे रिकॉर्ड बहुमत की सरकार बनाने के लिए मैदान में उतर जाएं।

इस दौरान शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 'श्रीमान बंटाधार' और 'करप्शन नाथ' जैसे संबोधनों का बार-बार इस्तेमाल करके मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के खिलाफ भाजपा के चुनाव प्रचार की रणनीति की स्पष्ट झलक भी पेश की। शाह ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार डबल इंजन सरकार के तौर पर प्रदेश को देश का नम्बर-एक राज्य बनाएगी। अमित शाह यहां भाजपा के विजय संकल्प सम्मेलन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

कमलनाथ को बताया करप्शन नाथ

अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता कमलनाथ को निशाने पर लेते हुए कहा, कमलनाथ की पूर्ववर्ती सरकार में महज डेढ़ साल के भीतर वर्ग-1 के 18,000 से ज्यादा अधिकारियों के तबादले कर दिए गए थे। इस सरकार के कार्यकाल में दलालों की मदद से केवल एक उद्योग शुरू किया गया था-तबादला उद्योग। इससे लोगों को श्रीमान बंटाधार का शासन याद आ गया था। शाह ने कहा, श्रीमान बंटाधार और करप्शन नाथ की सरकारों के वक्त राज्य का बजट महज 23,000 करोड़ रुपये का था, जबकि शिवराज सिंह चौहान की मौजूदा सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 3.14 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है।

बता दें, भाजपा ने राज्य में 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान उमा भारती की अगुवाई वाले प्रचार अभियान में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ श्रीमान बंटाधार शब्द का इस्तेमाल किया था, जबकि पिछले महीने राज्य में अज्ञात लोगों द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर कमलनाथ की तस्वीर के साथ करप्शन नाथ के संबोधन का उपयोग किया गया था।

कांग्रेस ने अनुच्छेद 370 को बच्चे की तरह पाला

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, श्रीमान बंटाधार और करप्शन नाथ सुन लें कि कांग्रेस ने अनुच्छेद 370 को 70 साल तक गोदी में अपने बच्चे की तरह पाल कर रखा था, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह अनुच्छेद हटाकर कश्मीर को भारत के साथ जोड़ दिया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि मध्यप्रदेश में डेढ़ साल चली कमलनाथ सरकार ने भाजपा सरकार द्वारा गरीब कल्याण के लिए शुरू की गईं 51 से ज्यादा योजनाएं बंद कर दी थीं ताकि बड़े-बड़े ठेके देकर ठेकेदारों से मोटा कमीशन लिया जा सके।

राम मंदिर और सर्जिकल स्ट्राइक का उठाया मुद्दा

शाह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण सरीखे मामलों में भी मोदी सरकार के कदमों की सराहना की। उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 2004 से 2014 के बीच संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में पाकिस्तान से आतंकी (भारत) आते थे और वारदातों को अंजाम देकर चले जाते थे, लेकिन तब केंद्र की सरकार उफ्फ तक नहीं करती थी। शाह कहा, कांग्रेस अपना नाम बदल ले, फिर भी क्या आप इस पार्टी को वोट दे सकते हैं? शाह ने दावा किया कि देश में 70 साल चली कांग्रेस सरकार ने गरीबों के लिए कुछ भी नहीं किया। उन्होंने कहा,गरीब कल्याण के कामों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूरे देश में गरीबों के मसीहा के रूप में जाने जाते हैं।

(भाषा इनपुट के साथ)

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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