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CM Mohan Yadav Father Passes Away: मप्र के CM मोहन यादव के पिता का निधन, उज्जैन रवाना

CM Mohan Yadav Father Passes Away: ​​मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पिता का निधन हो गया है। वह लंबे समय से अस्वस्थ्य चल रहे थे। पिता पूनम चंद यादव के निधन के बाद सीएम यादव भोपाल से उज्जैन के लिए रवाना हो गए हैं।

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CM Mohan Yadav Father Passes Away: मप्र के CM मोहन यादव के पिता का निधन, उज्जैन रवाना

CM Mohan Yadav Father Passes Away: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पिता का निधन हो गया है। वह लंबे समय से अस्वस्थ्य चल रहे थे और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पिता पूनम चंद यादव के निधन के बाद सीएम यादव भोपाल से उज्जैन के लिए रवाना हो गए हैं। बता दें, जिस समय सीएम मोहन यादव के पिता का निधन हुआ, मुख्यमंत्री भोपाल में आयोजित भाजपा सदस्यता अभियान 2024 के कार्यक्रम में मौजूद थे।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के पिता के निधन पर दुख जताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के पिताजी श्री पूनमचंद यादव जी के निधन की खबर अत्यंत दुःखद हैं। बाबा महाकाल दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान एवं शोकाकुल परिजनों को यह वज्रपात सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शान्ति। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के पिता श्री पूनमचंद यादव जी के निधन की खबर दुःखद है। भगवान दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं दुःख की इस घड़ी में परिजनों को सम्बल प्रदान करें। विनम्र श्रद्धांजली।

सिंधिया ने भी जताया दुख

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के पिता श्री पूनम चंद यादव जी के निधन का दु:खद समाचार प्राप्त हुआ। एक दिन पूर्व ही मुझे उनसे मिलने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। ईश्वर से दिवंगत पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान और मुख्यमंत्री जी एवं उनके परिजनों को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।

फादर्स डे पर पिता से मांगे थे पैसे

बात दें, हाल ही में सीएम मोहन यादव का अपने पिता के साथ वीडियो सामने आया था। उन्होंने फादर्स डेर पर पिता पूनमचंद यादव से मुलाकात की थी। इस दौरान मोहन यादव ने अपने पिता से पैसे मांगे तो उन्होंने 500 रुपये के नोटों की गड्डी निकालकर दे दी थी। हालांकि, सीएम यादव ने एक नोट अपने पास रखा और बाकी सारे नोट लौटा दिए थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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