Lok Sabha: लोकसभा की कार्यवाही शनिवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने बताया कि 18वीं लोकसभा के इस (सातवें) सत्र में कुल 31 बैठकें हुईं और सदन की कार्यवाही 151 घंटे तथा 42 मिनट तक चली। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कार्य उत्पादकता 93 प्रतिशत रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस समेत कई अन्य दलों के प्रमुख नेता सदन में मौजूद थे।
बजट सत्र की शुरुआत कब हुई थी?
बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किए जाने के साथ हुई। सदन ने पांच फरवरी को 2 घंटे 46 मिनट की चर्चा के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री मोदी के जवाब के बिना पारित कर दिया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पांच फरवरी को सदन में कहा कि एक दिन पहले कांग्रेस के कई सदस्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए।
राहुल गांधी के किस बयान पर मचा था हंगामा?
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में शुरू हुई चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण के हवाले से चीन के साथ टकराव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया था, लेकिन अध्यक्ष बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी। इस मुद्दे पर सदन में गतिरोध बना रहा। इसी दौरान आसन के समीप कागज उछालने और आसन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के मामले में कांग्रेस के आठ और एक माकपा सदस्य को संसद के वर्तमान सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। हालांकि बजट सत्र के दूसरे चरण में 17 मार्च को इन विपक्षी सदस्यों का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनके आग्रह पर सदन में नहीं आकर लोकसभा को अप्रिय दृश्य से बचाया और इसके लिए वह प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब प्रधानमंत्री द्वारा दिए जाने की परंपरा है।
ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
बजट सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ’’बोलने की इजाजत नहीं देने’’ तथा कांग्रेस की महिला सांसदों पर सदन में अनुचित स्थिति पैदा करने के आरोपों पर विपक्ष ने अध्यक्ष बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस 10 फरवरी को लोकसभा सचिवालय को सौंपा था। बिरला ने नोटिस दिए जाने के बाद फैसला किया था कि वह इस मामले का निपटारा होने तक आसन पर नहीं बैठेंगे। बजट सत्र के दूसरे चरण में 11 मार्च को अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया, जिसके बाद बिरला ने 12 मार्च से सदन की कार्यवाही का संचालन किया।
नहीं पास हो सका महिला आरक्षण संशोधन विधेयक
पहले यह सत्र दो अप्रैल को संपन्न होना था, लेकिन महिला आरक्षण से संबंधित ’संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ विधेयक और इससे संबंधित दो अन्य विधेयकों पर चर्चा करने और इन्हें पारित कराने के मकसद से सत्र को बढ़ा दिया गया था तथा 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिन की विशेष बैठक बुलाई गई थी। यह संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया। शुक्रवार को विधेयक पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।
12 सरकारी विधेयक किए गए थे पेश
बिरला ने बताया कि इस सत्र में कुल 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए और नौ पारित किए। पारित किए गए विधेयकों में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक 2026, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026, जन विश्वास संशोधन विधेयक 2026 और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 मार्च को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत के समक्ष आ रही चुनौतियों के बारे में सदन में एक वक्तव्य दिया। सदन में 30 मार्च को ’वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयास’ विषय पर नियम 193 के तहत एक अल्पकालिक चर्चा की गई, जो 6 घंटे 7 मिनट तक चली। गृह मंत्री अमित शाह ने इसका उत्तर दिया। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की धुन के साथ ही लोकसभा की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।
