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अजित पवार की पार्टी को लोकसभा सचिवालय से लगा झटका, शरद पवार के लिए आई ये बड़ी खुशखबरी

Parliament News: लोकसभा सचिवालय ने राकांपा (शरदचंद्र पवार) के लिए राहत भरी जानकारी साझा की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि राकांपा कार्यालय संसद परिसर में शरद पवार गुट के लिए है। अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को संसद परिसर में एक कक्ष आवंटित किए जाने वाले विवाद में ये अपडेट आया है।

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शरद पवार vs अजित पवार

Photo : Times Now Digital

Sharad Pawar vs Ajit Pawar: संसद भवन परिसर में एक कक्ष अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को आवंटित किए जाने संबंधी विवाद के बीच लोकसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि यह कक्ष शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के लिए है। लोकसभा सचिवालय की संपत्ति और विरासत प्रबंधन शाखा ने 11 सितंबर को संसद भवन और संविधान सदन (पुराने संसद भवन) में छोटे दलों को आवंटित कमरों की एक सूची सामने जारी की थी।

शरद पवार गुट के लिए आई बड़ी खुशखबरी

सूची के अनुसार, राकांपा को संविधान सदन में कक्ष 126-डी आवंटित किया गया था। चूंकि शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) के पास ‘असली’ राकांपा से अधिक सांसद हैं, इसलिए कमरे के आवंटन ने महाराष्ट्र में विवाद को जन्म दे दिया। अगले दिन लोकसभा सचिवालय ने एक शुद्धिपत्र जारी किया, जिसमें कहा गया कि यह कमरा राकांपा (शरदचंद्र पवार) को आवंटित किया गया है।

उद्धव और शिंदे गुट के लिए अगल-बगल कमरे

राकांपा (शरदचंद्र पवार) के आठ लोकसभा सदस्य हैं जबकि राकांपा का एक सदस्य है। राज्यसभा में राकांपा के तीन सदस्य हैं जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के दो सदस्य हैं। महाराष्ट्र के दो अन्य दलों- एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) को संविधान सदन में अगल-बगल के कक्ष आवंटित किए गए हैं।

जो बसपा के पास कार्यालय था, वो किसे मिला?

शिवसेना (यूबीटी) के पास संविधान सदन (पुराने संसद भवन) का वही कक्ष रहेगा, जो पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पास होता था। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रमुख सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी को नए संसद भवन में एक कक्ष आवंटित किया गया है। राजग के एक अन्य प्रमुख घटक जनता दल (यू) को संविधान सदन में एक कमरा उपलब्ध कराया गया है।

राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा रखने वाली आम आदमी पार्टी को भी पुराने संसद भवन में एक कक्ष आवंटित किया गया है। ये कक्ष 18वीं लोकसभा के कार्यकाल के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसका गठन संसदीय चुनाव के बाद जून में हुआ था। संख्याबल के आधार पर राजनीतिक दलों को संसद परिसर में कमरे आवंटित किए जाते हैं जहां वे बैठकें करते हैं। राजनीतिक दलों के सांसद कक्ष का उपयोग आराम करने और खानपान के लिए भी करते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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