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'INDIA' के दावे बरकरार, पर रिस्क लेने को नहीं कोई तैयार! सनातन से सुरक्षा तक घेरती रहेगी BJP, समझें- सियासी प्लान

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Dec 10, 2023, 07:37 AM IST

Lok Sabha Elections 2024: चुनावी विश्लेषकों और जानकारों की मानें तो विपक्षी गठबंधन को लेकर भाजपा की रणनीति बिल्कुल साफ है। भले ही विपक्षी गठबंधन में एकता नजर आए या न आए, उनके बीच आपस में टकराव नजर आए, लेकिन भाजपा के निशाने पर पूरा विपक्षी गठबंधन रहेगा।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

Lok Sabha Elections 2024: साल 2024 के आम चुनाव (लोकसभा इलेक्शन) से पहले विपक्षी गठजोड़ इंडिया के फुलप्रूफ दावे बरकरार हैं। भले ही सारे दलों में सीट शेयरिंग पर फिलहाल बात न बनी हो, मगर सभी एक होने की बात का दावा करते नजर आए हैं। शनिवार (नौ दिसंबर, 2023) को समाजवादी पार्टी (सपा चीफ) अखिलेश यादव ने इंडिया गठबंधन के साथ रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस दौरान कहा कि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने के लिए वह सबको साथ लेकर आगे बढ़ेंगे।

यूपी के पूर्व सीएम के मुताबिक, पहले दिन से ही सपा का लक्ष्य भाजपा का मुकाबला करना रहा है। भाजपा को हराने के लिए सभी लोगों का सम्मान करते हुए और उनका साथ लेते हुए वह आगे बढ़ेंगे। इस बीच, उनके सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने बताया कि वह इंडिया गठबंधन और अखिलेश के साथ हैं। वह विपक्षी दलों को साथ लेकर चलेंगे।

लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान वह आगे बोले कि कांग्रेस को (विधानसभा) चुनावों से सबक सीखना चाहिए, जिसमें नतीजे बहुत अच्छे नहीं आए। इन नतीजों से सीखने का मौका है। विपक्षी दलों की एकता में रालोद की बड़ी भूमिका है और आगे भी रहेगी। कांग्रेस को भी सभी घटक दलों को साथ लेकर चलना होगा।

आगे अखिलेश से मिलने के सवाल पर उन्‍होंने जवाब दिया, "मेरा कार्यक्रम बहुत छोटा था, जिसमें हम बहुत सारे लोगों से नहीं मिल पा रहे हैं। सपा-रालोद के तालमेल में कहीं कोई कमी नहीं है। हम सपा के साथ हैं। अखिलेश यादव ने कांग्रेस को लेकर जो भी कहा, बिलकुल सही कहा है। कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाना चाहिए, जो दल जहां मजबूत है, वहां दूसरे दल को उसका समर्थन करना चाहिए।"

उन्होंने यह भी बताया, "रालोद कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, यह अभी तय नहीं है। इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है। हमारी कोशिश है कि यह फार्मूला जल्दी तय हो जाए।" दरअसल, दक्षिण भारतीय सूबे तेलंगाना में बेशक भाजपा को उस तरह की जीत नहीं मिली हो, पर बड़े-बड़े दावे उसके नेता करते नजर आए थे। हालांकि, तेलंगाना में इस बार (2023 के विस चुनाव में) भाजपा का विधानसभा में संख्या बल और वोट प्रतिशत बढ़ा है।

चूंकि, कुछ महीने बाद होने वाले आम चुनाव से पहले मिली यह जीत भाजपा के लिए बहुत ज्यादा मायने रखती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें से तीन राज्यों में भाजपा (मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़) का सीधा मुकाबला कांग्रेस के साथ था, जिसमें कांग्रेस की हार हुई है। कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन में शामिल अन्य विपक्षी दल भी विधान सभा चुनाव में मिली हार को लेकर कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए नजर आए। सियासी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके बाद भी बीजेपी विपक्षी गठबंधन को लेकर कोई रिस्क लेने को तैयार नहीं है।

चुनावी विश्लेषकों और जानकारों की मानें तो विपक्षी गठबंधन को लेकर भाजपा की रणनीति बिल्कुल साफ है। भले ही विपक्षी गठबंधन में एकता नजर आए या न आए, उनके बीच आपस में टकराव नजर आए, लेकिन भाजपा के निशाने पर पूरा विपक्षी गठबंधन रहेगा। भाजपा के शीर्ष स्तर के नेता से लेकर कार्यकर्ता तक विपक्षी गठबंधन को 'इंडी अलायन्स ' और 'घमंडिया गठबंधन' के नाम से संबोधित करते रहेंगे।

भाजपा ने विपक्षी गठबंधन के खिलाफ रणनीति को लेकर अपने कैडर तक को यह संकेत दे दिया है कि भले ही पार्टी शानदार तरीके से विधान सभा चुनाव जीती हो, लेकिन पार्टी विपक्षी गठबंधन को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। भाजपा सनातन, राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन को घेरती रहेगी और पार्टी के निशाने पर खासतौर से कांग्रेस रहेगी।

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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