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दाऊद इब्राहिम की 'डी कंपनी' की तरह फैल रहा लॉरेंस बिश्नोई का आतंक, दुनियाभर में 700 शूटर्स और 11 राज्यों में दहशत

Lawrence Bishnoi Gang News: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के पास दुनियाभर में 700 शूटर्स हैं, जिसमें 300 पंजाब के हैं। लॉरेंस बिश्नोई और उसका सिंडिकेट नाटकीय अंदाज में बढ़ रहा है। यह ठीक उसी तरह है जैसे 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम का गैंग तेजी से दहशत फैल रहा था।

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दाऊद इब्राहिम की तरह फैल रहा लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क।

Lawrence Bishnoi Gang: गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। बीते कुछ सालों में जितने भी बड़े हत्याकांड हुए हैं, उनके पीछे लॉरेंस बिश्नोई का ही नाम सामने आया है। फिर चाहें पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की बीच सड़क हत्या हो या फिर करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी का मर्डर। अब एनसीपी नेता बाबा सिद्धीकी हत्या की जिम्मेदारी भी लॉरेंस गैंग ने ही ली है। जेल के अंदर से लॉरेंस किस तरह इन घटनाओं को अंजाम दे रहा है, यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी सिरदर्द बना हुआ है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एनआईए ने 16 गैंगस्टरों के खिलाफ UAPA के तहत चार्जशीट दाखिल की है। इसमें लॉरेंस बिश्नोई के साथ गोल्डी बरार का भी नाम शामिल है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी की तरह ही अपने पैर पसार रहा है।

लॉरेंस गैंग के पास 700 शूटर्स

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के पास दुनियाभर में 700 शूटर्स हैं, जिसमें 300 पंजाब के हैं। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसका सिंडिकेट नाटकीय अंदाज में बढ़ रहा है। यह ठीक उसी तरह है जैसे 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम का गैंग तेजी से दहशत फैल रहा था। एनआईए ने बताया कि दाऊद इब्राहिम के गैंग ने छोटे-छोटे अपराधों के अपना नेटवर्क बढ़ाया और ड्रग्स तस्करी में शामिल होकर उगाही का काम शुरू कर दिया। बाद में इसे डी कंपनी नाम दे दिया गया। बाद में यह गैंग पाकिस्तान के आतंकियों के साथ भी जुड़ गया।

गोल्डी बरार चलाता है गैंग

एनआईए ने बताया कि लॉरेंस बिश्नोई के गैंग को कनाडा से गोल्डी बरार चलाता है। यह कनाडा पुलिस और भारतीय एजेंसियों की लिस्ट में मोस्ट वॉन्टेड अपराधी है। चार्जशीट में आगे कहा गया है कि यह गैंग सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गैंग में शामिल करने का प्रयास करता है। युवाओं को विदेश भेजने और वहां की नागरिकता दिलवाने के लाचल में फंसाकर गैंग में शामिल किया जाता है। एनआईए ने यह भी बताया कि 2020-21 में इस गैंग ने करोड़ों रुपये हवाला के जरिए विदेश भेजे थे। गैंग ने पूरे उत्तर भारत में पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, दिल्ली में आपराधिक गैंगों के साथ गठजोड़ कर रखा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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