What is Habeas Corpus: पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी डॉक्टर गीतांजलि जे अंगमो ने अपने पति के हिरासत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की है। अपनी इस अर्जी में आंगमो ने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि वह अधिकारियों को वांगचुक के ठिकाने के बारे में स्पष्ट जानकारी देने और उनकी हिरासत से तत्काल रिहाई का आदेश देने का निर्देश दे। उन्होंने कहा कि वांगचुक को हिरासत में लिए जाने की सूचना मिलने के बाद से एक सप्ताह हो चुका है और उनकी हिरासत के आधार या उनकी सेहत की स्थिति के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। गीतांजलि का दावा है कि वांगचुक की हिरासत वाली कॉपी उन्हें नहीं मिली है और अपने पति से उनका कोई संपर्क नहीं है।
बता दें कि लद्दाख हिंसा मामले में वांगचुक की गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हुई है। वांगचुक पर लद्दाख में लोगों को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप है। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर बीते 24 सितंबर को प्रदर्शनकारियों एवं पुलिस के बीच हुई झड़प में चार लोगों की मौत हो गई और करीब 100 लोग घायल हुए।
क्या होती है हेबियस कॉर्पस अर्जी?
हेबियस कॉर्पस लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है 'तुम शरीर को प्रस्तुत करो'। यह एक कानूनी रिट (आज्ञापत्र) है जो किसी गैर-कानूनी रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत में पेश करने का आदेश देती है, ताकि हिरासत की वैधता का पता चल सके। इसे भारत में अनुच्छेद 32 (सुप्रीम कोर्ट द्वारा) और अनुच्छेद 226 (हाई कोर्ट द्वारा) के तहत जारी किया जा सकता है। यह रिट सिर्फ राज्य के खिलाफ ही नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ भी जारी की जा सकती है। जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है, तो वह स्वयं या उसके बिहाफ पर कोई मित्र या परिवार का सदस्य अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करता है। यह रिट हिरासत में लेने वाले व्यक्ति (जैसे जेलर या पुलिस अधिकारी) को उस कैदी या बंदी को तुरंत अदालत में पेश करने का आदेश देती है। अदालत फिर उस व्यक्ति को हिरासत में रखने के कारणों की जाँच करती है और तय करती है कि यह हिरासत कानूनी और वैध है या नहीं।
अंगमो ने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा
अंगमो ने बुधवार को राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र लिखकर अपने पति वांगचुक गैर कानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने का आरोप जड़ा। उन्होंने कहा कि अब तक न किसी अधिकारी ने फोन किया है और न ही पति से बात कराई है। रिपोर्टों के मुताबिक गीतांजलि ने कहा, 'हिरासत में लेते वक्त वांगचुक को ठीक से कपड़े भी नहीं पहनने दिए गए। पता नहीं उन्हें नए कपड़े और दवाएं दी गई हैं या नहीं। उपवास से वांगचुक कमजोर हो गए थे। 26 सितंबर को लेह एसएचओ इंस्पेक्टर रिगजिन गुरमेत ने फोन कर कहा कि गुरमेत ने सोनम को हिरासत में लिए जाने की सूचना दी।'
अपने ही लोगों पर कौन फायरिंग कराता है?-अंगमो
इससे पहले वांगचुक की पत्नी ने पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना भी की थी। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि वांगचुक को केवल 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'यह एक मनगढ़ंत चाल है। उन्होंने सुरक्षाबलों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सीआरपीएफ को गोली चलाने का आदेश किसने दिया? कौन अपने ही लोगों पर फायरिंग करता है? और खासकर ऐसा इलाका जहां आज तक कोई विरोध-प्रदर्शन नही हुआ है।
