Kisan Andolan: किसान नेताओं ने सरकारी एजेंसियों द्वारा पांच साल तक दाल, मक्का और कपास की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर करने के केंद्र के प्रस्ताव को सोमवार को खारिज कर दिया और कहा कि यह किसानों के हित में नहीं है। इसके साथ ही किसानों ने 21 फरवरी को फिर से दिल्ली कूच का ऐलान किया है। बता दें, इस समय हजारों की संख्या में किसान हरियाणा और पंजाब की सीमाओं पर डटे हुए हैं।
21 फरवरी को 'दिल्ली कूच' के ऐलान के बाद मंगलवार को किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने बड़ा बयान किया है। उन्होंने कहा है कि इस समय हरियाणा के जो हालात हैं, वो कश्मीर जैसे हैं। यहां 10 से 20 हजार अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। सरकार की मंशा साफ है कि हमें किसी भी दिल्ली नहीं पहुंचने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, हम 21 फरवरी को दोबारा आगे बढ़ेंगे, अब जो होगा उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
सामाधान ढूंढे या दिल्ली जाने दे
सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि हमने जब 13 मार्च को दिल्ली कूच का ऐलान किया था, उससे 10 दिन पहले हरियाणा के सभी बॉर्डर को सील कर दिया गया था। सरकार की मंशा साफ थी कि हमें किसी भी कीमत पर दिल्ली पहुंचने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, सरकार या तो बातचीत से समाधान निकाले या फिर हमें दिल्ली जाने दिया जाए। उन्होंने कहा, हमारे ऊपर गोलीबारी की गई, ट्रैक्टरों के टायरों पर गोली मारी गई। हरियाणा के डीजीपी कहते हैं कि हम किसानों पर टियर गैस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं जबकि हमारे ऊपर आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं। हम ऐसा करने वालों के खिलाफ सजा की मांग करते हैं।
सरकार ने क्या प्रस्ताव दिया?
किसानों के साथ रविवार रात चौथे दौर की बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ जैसी सहकारी समितियां अरहर दाल, उड़द दाल, मसूर दाल या मक्का का उत्पादन करने वाले किसानों के साथ एक अनुबंध करेंगी ताकि उनकी फसल को अगले पांच साल तक एमएसपी पर खरीदा जाए। खरीद की मात्रा की कोई सीमा नहीं होगी और इसके लिए एक पोर्टल विकसित किया जाएगा। गोयल ने यह भी प्रस्ताव दिया था कि भारतीय कपास निगम उनके साथ कानूनी समझौता करने के बाद पांच साल तक किसानों से एमएसपी पर कपास खरीदेगा। हालांकि, किसानों ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि यह किसानों के हित में नहीं है।
