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Nipah Virus: केरल में बजी खतरे की घंटी, संक्रमितों के संपर्क में आए 1080 लोग, कोझिकोड में 24 तक स्कूल बंद

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 16, 2023, 06:23 AM IST

Kerala Nipah Virus: केरल में 1080 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो संक्रमितों के संपर्क में आए थे। इसमें उच्च जोखिम वाले 175 आम और 122 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। राज्य सरकार के मुताबिक, केरल में अब तक निपाह वायरस के 6 मामले सामने आए हैं, जिसमें 2 लोगों की मौत हो चुकी है।

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केरल में निपाह वायरस के मामले

Photo : ANI

Kerala Nipah Virus: केरल में निपाह वायरस को लेकर खतरे की घंटी बज गई है। यहां संक्रमण काफी खतरनाक होता जा रहा है। बढ़ते मामलों को देखते हुए कोझिकोड में सभी शैक्षणिक संस्थानों को 24 सितंबर तक बंद कर दिया गया है। स्कूल, कॉलेज से लेकर कोचिंग संस्थानों तक को नहीं खोलने का आदेश राज्य सरकार की ओर से जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि अगले पूरे सप्ताह ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन किया जाएगा।

इस बीच केरल में 1080 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो संक्रमितों के संपर्क में आए थे। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि शुक्रवार को 130 लोगों को ट्रैक किया गया है, पता चला है कि संक्रमितों के सीधे संपर्क में आए लोगों में 327 स्वास्थ्य कर्मी हैं।

अन्य जिलों में भी संक्रमण का खतरा

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि कोझिकोड के अलावा अन्य जिलों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। कोझिकोड के अलावा दूसरे जिलों में 29 लोगों की पहचान की गई है, जो संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए हैं। इसमें 22 मलप्पुरम से, एक वायनाड से और तीन-तीन कन्नूर और त्रिशूर से हैं। इसमें उच्च जोखिम वाले 175 आम और 122 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं।

अब तक सामने आए 6 मामले

केरल में निपाह वायरस के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। यहां 6 संक्रमित लोगों की पहचान की गई है, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई है। राज्य सरकार के मुताबिक, केरल में अब एक्टिव मामलों की संख्या 4 हो गई है। इस बीच कोझिकोड में संक्रमण वाली ग्राम पंचायतों को क्वारंटीन कर दिया गया है।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने कहा है कि निपाह वायरस से मृत्यु दर 40 से 70 प्रतिशत के बीच है, यह कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु दर की तुलना में काफी ज्यादा है। बता दें, कोरोना संक्रमण से मृत्यु दर 2 से 3 प्रतिशत है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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