केरल उच्च न्यायालय ने नेदुम्बसेरी में ’मिनी कूपर’ कार दुर्घटना मामले में शुक्रवार को चार आरोपियों को जमानत दे दी। अदालत ने हालांकि निर्देश दिया कि मुख्य आरोपी सुहैल सजीव को 10 दिन बाद ही रिहा किया जाये। इस दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने सजीव, निनाव, जॉयल एंटो और अमीन शाह की जमानत याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया। पुलिस ने बताया कि 11 अक्टूबर को कोच्चि के नजदीक नेदुम्बसेरी में, एक तेज रफ़्तार ’मिनी कूपर’ कार ने दो पहिया वाहन को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में दो महलाओं समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष और मृतकों के परिवार की ओर से पेश वकील द्वारा जताई गई आशंकाओं पर विचार करने के बाद अदालत ने सजीव की रिहाई 10 दिन के लिए टाल दी। इससे पहले, एर्नाकुलम जिला एवं सत्र न्यायालय और अंगमाली न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
बचाव पक्ष ने कहा- 19 साल के हैं चारों आरोपी, पढ़ाई हो रही प्रभावित
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि चारों आरोपी 19 वर्षीय छात्र हैं और लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई है। अभियोजन पक्ष ने हालांकि जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि दुर्घटना में मारे गए तीनों लोग भी युवा थे और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि सजीव को छोड़कर अन्य आरोपी दुर्घटना के तुरंत बाद घटनास्थल से चले गए थे और बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। इसने दलील दी कि मामले की जांच जारी है और इसे जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन आरोपियों को रिहा करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
मुख्य आरोपी की रिहाई पर 10 दिन की रोक क्यों?
अभियोजन पक्ष और मृतकों के परिवार के वकील ने आशंका जताई कि प्रभावशाली परिवार से कथित तौर पर ताल्लुक रखने वाला सजीव रिहा होने पर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। मृतकों के परिवार के वकील ने यह भी कहा कि सजीव ने दुर्घटना के तुरंत बाद कथित तौर पर दावा किया था कि उसके पिता सब कुछ संभाल लेंगे। अदालत ने कहा कि केवल यह तथ्य उसे जमानत देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता।
वकील ने आरोप लगाया कि सजीव तेज रफ्तार से वाहन चलाने का आदी था और उसे जमानत देने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। अदालत ने चारों आरोपियों को जमानत देने का फैसला किया लेकिन निर्देश दिया कि सजीव को 10 दिन बाद ही रिहा किया जाए।
