Yam Deepak Jalane Ka Time Today 6 November 2026: धनतेरस का दिन सिर्फ खरीदारी और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए ही खास नहीं होता। इस दिन एक ऐसा दीपक भी जलाया जाता है, जिसका संबंध परिवार की खुशहाली और लंबी उम्र की कामना से जुड़ा है। इसे यम दीपक या यमराज का दीपक कहते हैं। मान्यता है कि धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में यम दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है।
इस साल धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आज यम दीपक कितने बजे जलाना चाहिए? क्या इसे लक्ष्मी पूजा के समय ही जलाते हैं या इसका मुहूर्त अलग होता है? आइए जानते हैं यम दीपक जलाने का सही समय, पूजा की विधि और इससे जुड़ी खास बातें।
आज यम दीपक जलाने का शुभ समय क्या है
यम दीपक प्रदोष काल में जलाया जाता है। कुछ पंचांग गणनाओं में यम दीपक का समय पूरे प्रदोष काल के बराबर नहीं होता। इसे सूर्यास्त के समय से रात के पहले दसवें हिस्से तक जलाने की परंपरा है। इसे लक्ष्मी पूजा के साथ एक ही समय पर जलाना जरूरी नहीं है। इसलिए यम दीपक के लिए अपने शहर के सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखा जाता है।
नोएडा और दिल्ली-एनसीआर में आज शाम करीब 5:30 बजे के बाद यम दीपक जलाने की तैयारी कर सकते हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त का समय बदलने के कारण मुहूर्त में भी अंतर रहता है।
आज यम का दीपक कब जलाना है
यम दीपदान का समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता। सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण प्रदोष काल भी बदल जाता है। 6 नवंबर 2026 के लिए प्रमुख शहरों का समय इस प्रकार है।
- दिल्ली - शाम 5:32 – 6:50
- नोएडा - शाम 5:32 – 6:50
- गुरुग्राम - शाम 5:34 – 6:52
- फरीदाबाद - शाम 5:32 – 6:50
- गाजियाबाद - शाम 5:32 – 6:50
- चंडीगढ़ - शाम 5:31 – 6:50
- अमृतसर - शाम 5:37 – 6:56
- लुधियाना - शाम 5:35 – 6:54
- देहरादून - शाम 5:27 – 6:46
- जयपुर - शाम 5:41 – 6:59
- लखनऊ - शाम 5:20 – 6:38
- कानपुर - शाम 5:23 – 6:41
- आगरा - शाम 5:31 – 6:50
- मथुरा - शाम 5:32 – 6:50
- वृंदावन - शाम 5:32 – 6:50
- अयोध्या - शाम 5:15 – 6:33
- प्रयागराज - शाम 5:19 – 6:36
- वाराणसी - शाम 5:14 – 6:32
- गोरखपुर - शाम 5:11 – 6:29
- जोधपुर - शाम 5:53 – 7:10
- उदयपुर - शाम 5:52 – 7:10
- पटना - शाम 5:05 – 6:22
- गया - शाम 5:07 – 6:24
- मुजफ्फरपुर - शाम 5:03 – 6:21
- रांची - शाम 5:08 – 6:25
- भोपाल - शाम 5:39 – 6:56
- इंदौर - शाम 5:46 – 7:03
- उज्जैन - शाम 5:46 – 7:03
- रायपुर - शाम 5:25 – 6:42
- अहमदाबाद - शाम 5:59 – 7:16
- सूरत - शाम 6:00 – 7:16
- वडोदरा - शाम 5:57 – 7:14
- राजकोट - शाम 6:07 – 7:24
- मुंबई - शाम 6:03 – 7:19
- पुणे - शाम 6:00 – 7:16
- नासिक - शाम 5:58 – 7:14
- नागपुर - शाम 5:35 – 6:52
- पणजी - शाम 6:04 – 7:19
- कोलकाता - शाम 4:56 – 6:13
- भुवनेश्वर - शाम 5:10 – 6:26
- गुवाहाटी - शाम 4:38 – 5:56
- शिलांग - शाम 4:38 – 5:56
- गंगटोक - शाम 4:49 – 6:07
- इंफाल - शाम 4:31 – 5:48
- अगरतला - शाम 4:43 – 6:00
- हैदराबाद - शाम 5:43 – 6:58
- बेंगलुरु - शाम 5:52 – 7:06
- चेन्नई - शाम 5:41 – 6:55
- विशाखापत्तनम - शाम 5:23 – 6:38
- कोच्चि - शाम 6:01 – 7:14
नोट: ये प्रदोष काल के समय हैं, लक्ष्मी पूजा के विशेष मुहूर्त नहीं। अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
यम दीपक जलाने की सही विधि क्या है
यम दीपक जलाने के लिए मिट्टी का दीपक लेना चाहिए। इसमें सरसों का तेल डालें और रुई की बत्ती लगाएं। इसके बाद घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखें। ध्यान रखें कि दीपक सीधे जमीन पर रखने के बजाय किसी छोटी थाली या साफ जगह पर रख सकते हैं। दीपक जलाते समय यमराज का स्मरण करें और परिवार की लंबी आयु की प्रार्थना करें। कुछ परिवारों में दीपक जलाने के बाद घर के सदस्य पीछे मुड़कर नहीं देखते और सीधे घर के अंदर आ जाते हैं। यह एक पारंपरिक मान्यता है।
यम दीपक दक्षिण दिशा में ही क्यों जलाया जाता है
हिंदू धर्म में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। यमराज को मृत्यु का देवता और धर्म का पालन कराने वाला माना जाता है। यही वजह है कि धनतेरस पर उनके नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा हिमा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। उनकी पत्नी ने पति को बचाने के लिए घर के दरवाजे पर सोने-चांदी के आभूषण और दीपक रख दिए। उन्होंने पूरी रात गीत और कहानियां सुनाकर पति को जगाए रखा। कहा जाता है कि जब यमराज सर्प के रूप में वहां पहुंचे तो दीपकों की चमक और आभूषणों के प्रकाश से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वह राजकुमार के प्राण लिए बिना लौट गए। इसी कथा से धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
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क्या धनतेरस पर यम दीपक और लक्ष्मी पूजा एक साथ होती है
नहीं, दोनों की परंपराएं अलग हैं। यम दीपक यमराज के निमित्त जलाया जाता है, जबकि लक्ष्मी पूजा धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना से की जाती है। इसलिए दोनों के मुहूर्त को एक नहीं समझना चाहिए।
