केरल विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने एक अहम फैसला लिया है। केरल विधानसभा चुनाव के लिए कैंपेन कमेटी का ऐलान कर दिया गया है। यह कमेटी राज्य में चुनाव प्रचार अभियान का काम संभालेगी। इसकी कमान रमेश चेन्निथला (Ramesh Chennithala) संभालेंगे। वहीं, शशि थरूर (Shashi Tharoor) को पार्टी ने उन्हें प्रचार कमेटी का सह-अध्यक्ष बनाया है।
पार्टी के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए कैंपेन कमेटी और मेनिफेस्टो कमेटी के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। शशि थरूर का लिस्ट में नाम आना काफी दिलचस्प है।
कांग्रेस के लिए अहम चुनाव
केरल में आगामी विधानसभा चुनाव अप्रैल–मई में होने की संभावना है। राज्य में पिछले 10 वर्षों से विपक्ष में बैठी कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती को देखते हुए इन समितियों के गठन को चुनावी तैयारी की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कांग्रेस की कैंपेन कमेटी में कौन-कौन शामिल?
पार्टी ने अपनी कैंपेन कमेटी में कई प्रमुख नेताओं को जगह दी हैं। इनमें कांग्रेस सांसद शफी परम्बिल प्रचार अभियान समिति के संयोजक होंगे, जिसमें हिबी ईडन, रोजी एम जॉन, सीआर महेश, मैथ्यू कुझालनदान, राम्या हरिदास, एम लिजू और दीप्ति मैरी वर्गीस सदस्य होंगे। कांग्रेस सांसद बेनी बेहनन घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक के सुरेश इसके सह-अध्यक्ष होंगे।
कांग्रेस नेताओं ने शशि थरूर से जताई थी नाराजगी
बता दें कि पिछले कुछ समय से शशि थरूर के कई बयानों पर कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जाहिर की थी। अटकलें लगाई जा रही थी कि कांग्रेस आलाकमान और शशि थरूर के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। हाल ही में केरल कांग्रेस वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन (K Muraleedharan) ने उनको पार्टी से अलग थलग किए जाने का इशारा किया था। उन्होंने कहा था ति थरूर को तिरुवनंतपुरम (केरल) में पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा।
उन्होंने कहा था कि थरूर कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य जरूर हैं, लेकिन उनके हालिया बयानों और रुख ने पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हम उन्हें तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाले किसी भी पार्टी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करेंगे। अब वह हमारे साथ नहीं हैं, इसलिए उनके किसी कार्यक्रम का बहिष्कार करने का सवाल ही नहीं उठता।
